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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 183 of 404

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Page 183

भाषाटीकासमेत। ( १६५ )
यवक्षार आदि खार, मिरच आदि तीखी और गरम, विदाहकारक, बांस और
करील आदि, तेल, सिंबी, खल, कुलथी, यूष, कडुआ, खट्टा, सौवीर ( कांजी ),
सुराविकार ( मद्यविशेष ), क्रोधसे, अग्निके समीप रहना, परिश्रम, सूर्यकी तीव्र
धूपमें डोलना, अतिमैथुन करना, विदाहकारक अन्न आदि इन कारणोंसे पित्त
कुपित होकर नाभिस्थानमें शूल उत्पन्न करता है। वह शूल तृषा, मोह, दाह, पीडा
इनको करे और पसीना, मूर्च्छा, भ्रम, शोष इनको करे, दोपहरके समय, मध्यरात्रिमें,
अन्नके विदाहकालमें, शरत्कालमें शूल अधिक होय। शीतकालमें शीतल पदार्थसे
और अत्यन्त मधुर मीठे शीतल अन्नसे यह शूल शांत होता है॥
कफशूलके कारण और लक्षण।
आनूपवारिजकिलाटपयोविकारैर्मांसेक्षुपिष्टकृशरातिलशष्कु-
लीभिः। अन्यैर्बलासजननैरपि हेतुभिश्च श्लेष्मा प्रकोपमुप-
गम्य करोति शूलम्॥ ९॥ हृल्लासकाससदनारुचिसंप्रसेकै-
रामाशये स्तिमितकोष्ठशिरोगुरुत्वैः। भुक्ते सदैव हि रुजं
कुरुतेऽतिमात्रं सूर्योदये च शिशिरे कुसुमागमे च॥ १०॥
जलके समीप रहनेवाले पक्षियोंका मांस, मछली आदिका मांस, दही वृत
मक्खन आदि दूधके विकार, मांस, ईखका रस, पिसा अन्न उडदकी पिठ्ठी वगै-
रह, खिचडी, तिल, पूरी, कचौडी आदि और कफकारकपदार्थ खानेसे कफ
कुपित होकर आमाशयमें शूलरोगको प्रगट करे। उसमें सूखी रूह, खांसी, ग्लानि,
अरुचि, मुखसे लार गिरे, बद्धकोष्ठता, मस्तक भारी हो ये लक्षण होयँ। भोजन
करते समय पीडा होय, सूर्योदयके समय, शिशिरऋतुमें और वसन्तकालमें
शूल बहुत होय॥
सन्निपातशूलके लक्षण।
सर्वेषु दोषेषु च सर्वलिङ्गं विद्याद्भिषक् सर्वभवं हि शूलम्।
सुकष्टमेनं विषवज्रकल्पं विवर्जनीयं प्रवदन्ति तज्ज्ञाः॥ ११॥
सम्पूर्ण दोषोंके कोप होनेमें वात पित्त कफ तीनों शूलके लक्षण होते हैं उसीको
सन्निपातका शूल कहते हैं। यह बडा दुःखदायक है, विष और वज्रके तुल्य है,
इसको विद्वान् असाध्य कहते हैं॥
आमशूलके लक्षण।
आटोपहल्लासवमीगुरुत्वस्तैमित्यमानाहकफप्रसेकैः।
कफस्य लिङ्गेन समानलिङ्गमामोद्भवं शूलमुदाहरन्ति॥ १२॥
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