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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 149 of 404

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Page 149

भाषाटीकासमेत । (१३१)
विषजन्य उन्मादके लक्षण ।
रक्तेक्षणो हतबलेन्द्रियभाः सुदीनः श्यावाननो विषकृतेन भवेद्विसंज्ञः।
विषसे प्रगट उन्मादमें नेत्र लाल होयँ, बल इन्द्रिय और शरीरकी कान्ति नष्ट हो
जाय, अति दीन हो जाय, उसके मुखपर कालौंच आजाय और संज्ञा जाती रहे ॥
विषज उन्मादके असाध्य लक्षण ।
अवाङ्मुखस्तूर्ध्वमुखो वा क्षीणमांसबलो नरः ।
जागरूको ह्यसन्देहमुन्मादेन विनश्यति ॥ १६ ॥
जिसका मुख नीचेको हो अथवा ऊपरको हो और जिसकामांस और बल
क्षीण होगया हो तथा जिसकी निद्रा जाती रही हो ऐसा मनुष्य निश्चय इस उन्माद-
करके नाशको प्राप्त हो ॥
भूतज उन्मादके लक्षण ।
अमर्त्यवाग्विक्रमवीर्यचेष्टाज्ञानादिविज्ञानबलादिभिर्यः ।
उन्मादकालो नियतश्च यस्य भूतोत्थमुन्मादमुदाहरेत्तम् ॥ १७॥
वाणी, पराक्रम, शक्ति, देहका व्यापार, तत्त्वज्ञान, शिल्पादि ज्ञान अथवा ज्ञान
कहिये शास्त्रज्ञान और विज्ञाननाम तदर्थनिश्चय, आदिशब्दसे स्मृत्यादिक ये जिसकी
मनुष्यकीसी न होयँ और जिसका उन्मत्त होनेका काल निश्चय होय, ऐसे उन्मादको
भूतोन्माद कहते हैं। भूतशब्दसे यहां आगे कहेंगे सो सब देवता जानने ॥
देवग्रहजके लक्षण ।
सन्तुष्टः शुचिरतिदिव्यमाल्यगन्धो निस्तन्द्रस्त्ववितथसंस्कृत-
प्रभाषी । तेजस्वी स्थिरनयनो वरप्रदाता ब्रह्मण्यो भवति नरः
स देवजुष्टः ॥ १८ ॥
सदा संतोषयुक्त रहे, पवित्र रहे, देहमें दिव्यपुष्पके समान सुगंध, नेत्रोंके पलक
लगे नहीं, सत्य और संस्कृतका बोलनेवाला हो, तेजस्वी, स्थिरदृष्टि, वरका देनेवाला
(तेरा कल्याण हो ऐसे वर देवे), ब्राह्मणसे प्रीति राखे ऐसा मनुष्य देवग्रहपीडित
जानना । देवशब्दसे गणमातृकादि ग्राह्य हैं सो विदेहने कहा भी है ॥
१ क्रोधेन स्तब्धसर्वाङ्गो लालाफेनाविलाननः । निद्रालुः कंपते मूको गणमातृभिरार्दितः ॥