माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context( १३० ) माधवनिदान ।
कफजन्य उन्मादके कारण और लक्षण ।
संपूरणैर्मन्दविचेष्टितस्य सोष्मा कफो मर्मणि संप्रवृत्तः ।
बुद्धिं स्मृतिं चाप्युपहन्ति चित्तं प्रमोहयन्संजनयेद्विकारम् ॥ ११ ॥
वाक्चेष्टितं मन्दमरोचकश्च नारीविविक्तप्रियताऽतिनिद्रा ।
छर्दिश्च लाला च बलं च भुंक्ते नखादिशौक्ल्यं च कफात्मके स्यात् १२
मन्द भूखमें भोजन कर कुछ परिश्रम न करे, ऐसे पुरुषके पित्तयुक्त कफ हृद्-
यमें अत्यन्त बढकर बुद्धि स्मरण और चित्त इनकी शक्तिका नाश करे और मोहित
हो, उन्मादरूपविकारको उत्पन्न करे उस विकारसे वाणीका व्यापार कहिये बोलना
इत्यादि मन्द हो, अरुचि होय, स्त्री प्यारी लगे, एकांतवास करे, निद्रा अत्यन्त आवे,
वमन होय, मुखसे लार बहे, भोजन करे पिछाडी इस रोगका जोर हो । नख आदि-
शब्दसे त्वचा, मूत्र, नेत्रादिक ये सफेद होयँ ये लक्षण कफके उन्मादके हैं ॥
सन्निपात उन्मादके लक्षण ।
यः सन्निपातप्रभवोऽतिघोरः सर्वैः समस्तैरपि हेतुभिः स्यात् ।
सर्वाणि रूपाणि बिभर्ति तादृग्विरुद्धभैषज्यविधिर्विवर्ज्यः ॥ १३ ॥
जो उन्माद वातादिक दोष करके अथवा तीनों दोषोंके कारण करके होय वह
सन्निपातजन्य उन्माद बहुत भयंकर होता है । उसमें सब दोषोंके लक्षण होते हैं।
इसमें विरुद्ध औषधकी विधि वर्जित है। यह उन्माद वैद्यों करके त्याज्य है। कारण
यह कि, असाध्य है ॥
शोकज उन्मादके लक्षण ।
चौरैर्नरेन्द्रपुरुषैररिभिस्तथान्यैर्वित्रासितस्य धनबान्धवसंक्ष-
याद्वा । गाढं क्षते मनसि च प्रियया रिरंसोर्जायेत चोत्कटतरो
मनसो विकारः ॥ १४ ॥ चित्रं ब्रवीति च मनोऽनुगतं विसंज्ञो
गायत्यथो हसति रोदिति चातिमूढः ।
चोरोंने, राजाके मनुष्योंने अथवा शत्रुओंने उसी प्रकार सिंह, व्याघ्र, हाथी
आदि किसीने त्रास दिया होय अथवा धन बंधुके नाश होनेसे ऐसे पुरुषका
अन्तःकरण अत्यन्त दुखे, अथवा प्यारी स्त्रीसे संभोग करनेकी इच्छावाले
पुरुषके मनमें भयंकर विकार उत्पन्न होय, वह पुरुष गुप्त बातको भी कहने लगे
और अनेक प्रकारसे बोले, विपरीत ज्ञान होय तथा गावे, हँसे और रोवे तथा
मूर्ख हो जाय ॥
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