खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
DevanagariHindipublished610 पृष्ठ
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६१. सामान्य-लक्षण का खण्डन ... ... ४४०
६२. सम्बन्ध-लक्षण का खंडन ... ... ४४५
६३. आधार-लक्षण का खण्डन ... ... ४५०
६४. विषय-विषयिभाव-लक्षण का खण्डन ... ४५८
६५. भेद-लक्षण का खण्डन ... ... ४७२
६६. कारणत्व-लक्षण का खण्डन ... ... ५०२
६७. वर्त्तमानत्वादि-लक्षणों का खण्डन ... ... ५१६
६८. संशय-लक्षण का खण्डन ... ... ५२७
६६. भावाभाव-विरोध का खण्डन ... ... ५३५
७०. तर्क-सामान्य-लक्षण का खण्डन ... ... ५४३
७१. तर्क-विशेष-लक्षणों का खण्डन ... ... ५५५
७२. अप्रसङ्गात्मक तर्क का निरूपण ... ... ५६६
७३. तर्काभास का खण्डन ... ... ५७६
७४. सर्व-खण्डन-प्रकार का उपदेश ... ... ५७८
७५. उपसंहार ... ... ५८०