कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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कारसमर्थानिन्दु क्षियतो वा भर्तृविनाशमुपांशुदण्डेन प्रशमयेत् । स्वदेशीयान् वा परेण वावरुद्धानपवाहितस्थानेषु स्थापयेत् ।
(१) यश्च तत्कुलीनः प्रत्यादेयमादातुं शक्तः प्रत्यन्ताटवीस्थो वा प्रबाधितुमभिजातः, तस्मै विगुणां प्रयच्छेत्; गुणवत्याश्चतुर्भागं वा कोशदण्डदानमवस्थाप्य, यदुपकुर्वाणः पौरजानपदान् कोपयेत् । कुपितैस्तैरेनं घातयेत्, प्रकृतिभिरपकृष्टमपनयेदौपघातिके वा देशे निवेशयेदिति ।
(२) भूतपूर्वे येन दोषेणापवृत्तः, तं प्रकृतिदोषं छादयेत् । येन च गुणेनोपावृत्तः, तं तीव्रीकुर्यादिति ।
(३) पित्र्ये पितृदोषाञ् छादयेत् । गुणांश्च प्रकाशयेदिति ।
की प्रवृत्ति से उसके यहाँ रहते हों उन्हें उपांशुदण्ड देकर समाप्त कर दिया जाय । अपने देश के तथा शत्रु द्वारा बन्दी बनाये गये लोगों को विजयी राजा उन अधिकार-पदों पर नियुक्त करे, जो शत्रु पक्ष के पुरुषों को पदच्युत करने से रिक्त हुए हों ।
(१) शत्रु से छीने हुए राज्य को यदि कोई शत्रुवंशज वापिस लेने में समर्थ हो, अथवा सीमांत प्रदेश के सामन्त या आटविक के द्वारा उस राज्य पर बाधा पहुँचाये जाने की संभावना हो तो विजिगीषु राजा उन्हें किसी गुणहीन (ऊसर) भूमि का कुछ हिस्सा दे दे, अथवा उन्हें गुणवती (उर्वर) भूमि का चौथा हिस्सा इस शर्त पर दे कि वह सामंत विजिगीषु का अधिकाधिक कोष और सेना देता रहेगा । ऐसा कराने का यह परिणाम होगा कि धन तथा सेना को इकट्ठा करने में सामंत अपनी प्रजा को कुपित कर देगा । इस प्रकार प्रजाजनों के कुपित हो जाने पर बाद में इन्हीं के द्वारा उस सामंत का वध कराया जाय । अथवा अमात्य आदि प्रकृतियों के द्वारा निन्दा की जाने पर उस सामंत को वहाँ से हटा दिया जाय । या उसको ऐसे प्रदेश में भेज दिया जाय, जहाँ उसके विनाश के अनेक साधन विद्यमान हों ।
(२) भूतपूर्व लाभ : अपने अपहृत भूतपूर्व राज्य को पुनः प्राप्त कर विजिगीषु राजा को चाहिए कि अपने उस दोष का वह परित्याग कर दे, जिसके कारण उसका राज्य उसके हाथ से निकल गया था और अपने जिन गुणों के कारण उसने शत्रु के हाथ से अपना राज्य पुनः प्राप्त किया हो, उनको अधिक बढ़ाये ।
(३) पित्र्य लाभ : यदि पिता के दोषों के कारण राज्य शत्रु के कब्जे में गया हो तो विजिगीषु को उचित है कि पिता के उन दोषों को छिपा दे, जिनके कारण राज्य पर शत्रु ने अधिकार कर लिया था और पिता के जो अच्छे गुण रहे हों, उनको प्रकट करता रहे ।