Skip to content
SarvaKosh
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 811 of 918

Read in context
Page 811

प्र० १७४-१७५ : अ० ४] दुर्ग को अधिकार में करना ७२७

(१) तेन दण्डोपनताटविका व्याख्याताः ।
(२) दण्डोपनताटविकयोरन्यतरो वा संरुद्धस्य प्रेषयेत्—'अयं संरोद्धा व्याधितः, पार्ष्णिग्राहेणाभियुक्तः, छिद्रमन्यदुत्थितम्, अन्यस्यां भूमावपयातुकामः' इति । प्रतिपन्ने संरोद्धा स्कन्धावारमादीप्यापयायात् । ततः पूर्ववदाचरेत् ।
(३) पण्यसम्पातं वा कृत्वा पण्येनै नं रसविद्धेनातिसन्दध्यात् ।
(४) आसारव्यञ्जनो वा संरुद्धस्य दूतं प्रेषयेत्—'मया बाह्यमभिहतमुपनिर्गच्छाभिहन्तुम्' इति । प्रतिपन्नं पूर्ववदाचरेत् ।
(५) मित्रं बन्धुं वापदिश्य योगपुरुषाः शासनमुद्राहस्ताः प्रविश्य दुर्गं ग्राहयेयुः ।
(६) आसारव्यञ्जनो वा संरुद्धस्य प्रेषयेत्—'अमुष्मिन् देशे काले च


( १ ) इसी प्रकार दण्डोपनत और आटविकों के सम्बन्ध में भी समझ लेना चाहिए ।

( २ ) अथवा उन दण्डोपनत ( बलपूर्वक वश में किये गये राजा ) और आटविक ( जंगली राजा ) दोनों में से किसी एक द्वारा उस घिरे हुए शत्रु-राजा के पास यह संदेश भेजा जाय कि 'यह घेरा डालने वाला विजिगीषु आजकल व्याधिग्रस्त है, पार्ष्णिग्राह ने भी उस पर हमला कर दिया है, ऐसी स्थिति में वह यहाँ से अन्यत्र भाग जाने को तैयार है।' जब घिरा हुआ शत्रु-राजा इन बातों से सहमत हो जाय तब विजिगीषु अपनी छावनी में आग लगाकर वहाँ से चला जाय । उसके बाद पूर्ववत् शत्रु-राजा को बीच में घेर कर समाप्त कर दिया जाय ।

( ३ ) अथवा व्यापारियों के संघ द्वारा उपहारस्वरूप भेजे गये द्रव्यों में विष मिला कर उन्हें किले में पहुँचा दिया जाय ।

( ४ ) अथवा मित्र की सेना में प्रमुख अधिकारी के वेष में रहने वाला गुप्तचर घिरे हुए शत्रु-राजा के पास इस प्रकार का संदेश लेकर दूत को भेजे कि 'मैंने तुम्हारे इस बाह्य शत्रु को एकदम शक्तिहीन बना दिया है । अब इसको सर्वथा नष्ट करने के लिए तुम दुर्ग से बाहर निकल आओ।' जब शत्रु इस विश्वास पर बाहर निकल आवे तो उसे दोनों ओर से घेर कर पूर्ववत् मार दिया जाय ।

( ५ ) अथवा अपने-आपको मित्र का बंधु बताकर मुहर लगे बनावटी लेखपत्र को हाथ में लेकर गुप्तचर दुर्ग के भीतर प्रवेश कर दें और वहाँ किसी उपाय से फाटक आदि खोलकर उस दुर्ग को विजिगीषु के अधिकार में कर दें ।

( ६ ) अथवा मित्र सेना के प्रमुख अधिकारी के वेष में रहने वाला गुप्तचर उस घिरे हुए शत्रुराजा के पास यह संदेश भेजे कि 'मैं अमुक समय और अमुक स्थान में