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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 767 of 918

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Page 767
प्रकरण १६३मन्त्रयुद्धम्
अध्याय २

(१) स चेत्सन्धौ नावतिष्ठेत, ब्रूयादेनम्—‘इमे षड्वर्गवशगा राजानो विनष्टाः, तेषामनात्मवतां नार्हसि मार्गमनुगन्तुम्, धर्ममर्थं चावेक्षस्व, मित्रमुखा ह्यमित्रास्ते ये त्वां साहसधर्ममर्थातिक्रमं व ग्राहयन्ति, शूरैस्त्यक्तात्मभिः सह योद्धुं साहसं जनक्षयमुभयतः कर्तुमधर्मः; दृष्टमर्थं मित्रमदुष्टं च त्यक्तुमर्थातिक्रमः। मित्रावांश्च स राजा भूयश्चैतेन अर्थेन मित्राण्युद्योजयिष्यति, यानि त्वा सर्वतोऽभियास्यन्ति। न च मध्यमउदासीनयोर्मण्डलस्य वा परित्यक्तः, भवांस्तु परित्यक्तो ये त्वां समुद्युक्तमुपप्रेक्षन्ते—‘भूयः क्षयव्ययाभ्यां युज्यतां, मित्राच्च भिद्यताम्, अथैनं परित्यक्तमूलं सुखेनोध्छेत्स्याम’ इति। स भवान् नार्हति मित्रमुखानाममित्राणां श्रोतुं मित्राण्युद्वेज-


मंत्रयुद्ध

( १ ) यदि प्रबल अभियोक्ता संधि के लिए राजी न हो तो उससे कहा जाय कि 'देखिए; काम, क्रोधादि अरि षड्वर्ग के चंगुल में फँस कर इन विनष्ट हुए राजाओं का उदाहरण आपके सामने प्रत्यक्ष है, आपको ऐसे नीच-राजाओं का अनुसरण करना शोभा नहीं देता है, अपने धर्म और अर्थ की ओर तो देखिए। आपके ये ऊपरी मित्र वस्तुतः आपके भीतरी शत्रु हैं, जो आपको युद्ध, अधर्म और अपव्यय की ओर प्रेरित कर रहे हैं, अपने प्राणों को हथेली पर रखकर दूसरे बलवान् राजा के साथ युद्ध करना ही तो साहस है, उसमें दोनों ओर के आदमियों का नाश होता है, यही तो अधर्म है; विद्यमान धन और अत्यन्त सज्जन मित्र को छोड़ने के लिए आपको जो प्रोत्साहित किया जा रहा है, वही तो धन का अपव्यय है; उस राजा के और भी मित्र हैं, इसी धन से वह अपने उन मित्रों को साथ लेकर आप पर ही आक्रमण कर देगा; मध्यम और उदासीन राजा भी उसकी मदद के लिए तैयार बैठे हैं; लेकिन आपको तो उन्होंने त्याग दिया है, युद्ध के लिए तैयार आपको वे लोग चुपचाप देख रहे हैं कि आपके प्रभूत जन-धन का नाश हो जाय और आपका अपने मित्र के साथ मतभेद हो जाय, इस प्रकार जब आपकी सारी शक्ति क्षीण हो जायेगी और जब आप अपनी राजधानी को छोड़कर युद्ध में चले जायेंगे तो वे बड़ी सरलता से आपका उच्छेद कर देंगे, इसलिए आपके लिए यही उचित है कि ऊपर से मित्र बने