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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 756 of 918

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Page 756

६७२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ ग्यारहवां अधिकरण

(१) एतेन स्कन्धावाराटवीभेदो व्याख्यातः ।
(२) सङ्घमुख्यपुत्रमात्मसंभावितं वा सत्त्री ग्राहयेत्—'अमुष्य राज्ञः पुत्रस्त्वं शत्रुभयादिह न्यस्तोऽसि' इति । प्रतिपन्नं राजा कोशदण्डाभ्यामुपगृह्य सङ्घेषु विक्रमयेत्; अवाप्तार्थस्तमपि प्रवासयेत् ।
(३) बन्धकीपोषकाः प्लवकनटनर्तकसौभिका वा प्रणिहिताः स्त्रीभिः परमरूपयौवनाभिः सङ्घमुख्यानुन्मादयेयुः । जातकामानामन्यतमस्य प्रत्ययं कृत्वाऽन्यत्र गमनेन प्रसभहरणेन वा कलहानुत्पादयेयुः । कलहे तीक्ष्णाः कर्म कुर्युः–हतोऽयमित्थं कामुकः' इति ।
(४) विसंवादितं वा मर्षयमाणमभिसृत्य स्त्री ब्रूयात्—असौ मां मुख्यस्त्वयि जातकामां बाधते, तस्मिन् जीवति नेह स्थास्यामि' इति घातमस्य प्रयोजयेत् ।


जब वे लोग उससे अपना सामान माँगे तो कह दे कि 'वह सामान मुखिया को वापिस कर दिया गया है।' इस रीति से सभी गुप्तचर, संघ के लोगों और मुखिया के बीच भेद डाल दें ।

( १ ) अपनी छावनी में प्रविष्ट आटविक लोगों को परस्पर फोड़ने के लिए भी उक्त उपायों को ही उपयोग में लाना चाहिए ।

( २ ) उपांशुवध : संघमुख्य के अभिमानी पुत्र को सभी गुप्तचर यह कह कर बहकायें कि 'तू अमुक राजा का पुत्र है, शत्रु भय से यहाँ रख दिया गया है'। यदि संघ मुख्य का पुत्र इस बात को मान जाय तो उसको कोष और सेना की सहायता देकर संघों के ऊपर आक्रमण के लिए भेज दिया जाय । उसके द्वारा जब अपने कार्य की सिद्धि हो जाय तो बाद में उसको भी प्रवासित कर दिया जाय या मार दिया जाय ।

( ३ ) कुलटा स्त्रियों का पालन-पोषण करने वाले या प्लवक, नट, नर्तक और सौभिक वेष में रहने वाले गुप्तचर अत्यंत सुन्दरी यौवन-संपन्न स्त्रियों के द्वारा संघमुख्यों को प्रमादी बनायें । जब स्त्रियों में बहुत से संघमुख्यों की आसक्ति हो जाय तो उनमें से किसी एक को किसी सांकेतिक स्थान पर स्त्री से मिलने का वायदा कर, ठीक समय पर उस स्त्री को वहाँ से किसी दूसरे संघमुख्य के द्वारा अन्यत्र भिजवा दें या उसके द्वारा अपहरण करा दें और बाद में इसी निमित्त उन संघमुख्यों का परस्पर झगड़ा करा दें । झगड़ा होने पर तीक्ष्ण गुप्तचर उनमें से किसी एक संघ मुख्य को मार डालें और बाद में यह अफवाह उड़ा दें कि एक कामी पुरुष ने दूसरे कामी पुरुष का वध कर डाला है ।

( ४ ) यदि उन संघमुख्यों में एक व्यक्ति स्त्री के लिए झगड़ा न करना चाहे तो