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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 625 of 918

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Page 625

प्र० १२२-१२३ : अ० १७ ] सन्धिकर्म और सन्धिमोक्ष ५४१

परम्परयोपतिष्ठेरन् । तेषामनियतकालप्रवेशस्थाननिर्गमनानि स्थापयेत् । ततस्तद्व्यञ्जनो वा रात्रौ प्रतिष्ठेत ।
(१) तेन रूपाजीवा भार्याव्यञ्जनाश्च व्याख्याताः ।
(२) तेषां वा तूर्यभाण्डपेलां गृहीत्वा निर्गच्छेत् ।
(३) सूदारालिकस्नापकसंवाहकास्तरककल्पकप्रसाधकोदकपरिचारकैर्वा द्रव्यवस्त्रभाण्डपेलाशयनासनसम्भोगैर्निह्रियेत ।
(४) परिचारकच्छद्मना वा किञ्चिद्रूपवेलायामादाय निर्गच्छेत् । सुरङ्गामुखेन वा निशोपहारेण । तोयाशये वा वारुणं योगमातिष्ठेत् ।
(५) वैदेहकव्यञ्जना वा पक्वान्नफलव्यवहारेणारक्षिषु रसमवचारयेयुः ।

नट, नर्तक, गायक, वादक, वाग्जीवक ( कथावाचक ) ; कुशीलव, प्लवक ( तलवार आदि का खेल दिखाने वाला ), सौत्रिक ( आकाश में उड़ने वाला ), विजिगीषु के ये आठ प्रकार के गुप्तचर पहिले शत्रु राजा के पास आवें और फिर धीरे-धीरे उसी के यहाँ रहते हुए गिरफ्तार राजकुमार तक पहुँचे । राजकुमार, राजा की अनुमति प्राप्त कर, स्वेच्छया उक्त गुप्तचरों को अपने यहाँ टिकाने तथा आने-जाने की पूरी व्यवस्था करा ले । फिर उन्हीं में से किसी का वेष बनाकर रात्रि के समय बाहर निकल आवे और उन्हीं के साथ अपने देश को पलायन कर दे ।

( १ ) इसी प्रकार वेश्या या पत्नी के रूप में गई गुप्तचर स्त्रियाँ राजकुमार को वहाँ से छुड़ा ले आवें ।

( २ ) अथवा नट, नर्तक आदि के साज-बाजों या आभूषणों की पेटी को उठा कर बाहर निकल आये ।

( ३ ) अथवा सूद ( रसोइया ), आरालिक ( हलवाई ), स्नापक ( स्नान कराने वाला ), संवाहक ( मालिश करने वाला ), आस्तरक ( विस्तार बिछाने वाला ), कल्पक ( नाई ), प्रसाधक ( वस्त्र पहनाने वाला ) और उदक-परिचारक ( जल देनेवाला ); इन लोगों के द्वारा जब कोई भोज्यपदार्थ, पेटी या विस्तर आदि उपयोगी वस्तुयें बाहर ले जाई जाँय तो अवसर पाकर उनके साथ राजकुमार भी बाहर निकल जाय ।

( ४ ) अथवा राजकुमार ही नौकर के बहाने से अन्धकार के समय किसी चीज को लेकर बाहर निकल जाय । अथवा भूतवलि आदि का बहाना कर सुरंग द्वारा बाहर निकल जाय । अथवा नदी, तालाब आदि किसी बड़े जलाशय में वारुणयोग के प्रयोग द्वारा बाहर निकल जाय ।

( ५ ) अथवा व्यापारी के वेष में रहने वाले गुप्तचर किसी पके अन्न में विष मिला कर पहरेदारों को दे दें और जब वे बेहोश हो जाँय तो राजकुमार को लेकर लेकर वे बाहर निकल जाँय ।