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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 483 of 918

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Page 483

प्र० ८८ : अ० १३ ] अतिचार का दण्ड ३९९

(१) ग्रामेष्वन्तः सार्थिका ज्ञातसारा वसेयुः । मुषितं प्रवासितं चैषामनिर्गतं रात्रौ ग्रामस्वामी दद्यात् । ग्रामान्तेषु वा मुषितं प्रवासितं विवीताध्यक्षो दद्यात् । अविवीतानां चोररज्जुकः । तथाप्यगुप्तानां सीमावरोधविचयं दद्युः । असीमावरोधे पञ्चग्रामी दशग्रामी वा ।
(२) दुर्बलं वेश्म शकटमनुक्तबर्धमूर्ध्वस्तम्भं शस्त्रमनपाश्रयमप्रतिच्छन्नं श्वभ्रं कूपं कूटावपातं वा कृत्वा हिंसायां दण्डपारुष्यं विद्यात् ।
(३) वृक्षच्छेदने दम्यरश्मिहरणे चतुष्पदानाम्दान्तसेवने वाहने काष्ठलोष्ठपाषाणदण्डबाणबाहुविक्षेपेषु याने हस्तिना च सङ्घट्टने 'अपेहि' इति प्रक्रोशन्नदण्ड्यः ।
(४) हस्तिना रोषितेन हतो द्रोणान्नं कुम्भं माल्यानुलेपनं दन्तप्रमार्जनं च पटं दद्यात् । अश्वमेधावभृथस्नानेन तुल्यो हस्तिना वध इति पादप्रक्षालनम् । उदासीनवधे यात्तूत्तमो दण्डः ।


(१) यात्रा करते समय यदि कोई व्यापारी किसी गाँव में ठहरे तो अपने पूरे सामान की सूचना गाँव के मुखिया को दे । रात में उसकी यदि कोई चोरी हो जाय या गाँव में उसकी कोई वस्तु छूट जाय तो उस वस्तु को गाँव का मुखिया दे । यदि कोई वस्तु गाँव के बाहर छूट गई या चोरी गई हो तो उसकी पूर्ति चरागाह का अध्यक्ष (विवीताध्यक्ष) करे । यदि वहाँ पर चरागाहों की व्यवस्था न हो तो उस वस्तु को चोर पकड़ने वाले राजपुरुष (चोर-रज्जुक) अदा करें । यदि फिर भी वस्तु सुरक्षित न रह सके तो जिसकी सीमा में उसकी चोरी हुई हो वही सीमाध्यक्ष उसको दे । यदि फिर भी कोई प्रबंध न हो सके तो आस-पास के पाँच-दस गाँवों की पंचायतें उस वस्तु को ढूँढ़ कर व्यापारी को दें ।

(२) मकान की कच्ची दीवार के कारण, गाड़ी की पटरी की कमजोरी के कारण, हथियार को ठीक तरह से न रखने के कारण, गड्ढे न पूरे जाने के कारण और बिना जंगले के कुएँ के कारण यदि कोई व्यक्ति किसी की मृत्यु का कारण बन जाय तो उसे दण्डपारुष्य प्रकरण में निर्दिष्ट नियमों के अनुसार दण्ड दिया जाय ।

(३) पेड़ काटते समय, मारू जानवरों को खोलते समय, जानवरों को पहिले-पहिले सवारी में जोतते समय, अथवा दो दलों में लकड़ी, ढेला, पत्थर, बाण आदि चलते समय, हाथी की सवारी करते समय और बीच में आने से वारित करते समय यदि किसी का हाथ-टूट जाय तो किसी को दण्ड न दिया जाय ।

(४) यदि कोई व्यक्ति क्रुद्ध हाथी के चपेट में आकर मर जाय तो उसके परिवारजनों को यह आवश्यक है कि वे एक द्रोण अन्न, एक घड़ा शराब, माला, चंदन और दाँत साफ करने का वस्त्र उस हाथी को भेंट करें । क्योंकि जितना पुण्य अश्वमेध यज्ञ की समाप्ति पर पवित्र स्नान करने से होता है उतना ही पुण्य हाथी के द्वारा मारे