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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 482 of 918

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Page 482
प्रकरण ८८# अतिचारदण्डः
अध्याय १३

(१) ब्राह्मणमपेयमभक्ष्यं वा संग्रासयत उत्तमो दण्डः। क्षत्रियं मध्यमः, वैश्यं पूर्वः साहसदण्डः, शूद्रं चतुष्पञ्चाशत्पणो दण्डः।
(२) स्वयंग्रसितारो निर्विषयाः कार्याः।
(३) परगृहाभिगमने दिवा पूर्वः साहसदण्डः। रात्रौ मध्यमः। दिवा-रात्रौ वा सशस्त्रस्य प्रविशत उत्तमो दण्डः।
(४) भिक्षुकवैदेहकौ मत्तोन्मत्तौ बलादापदि चातिसन्निकृष्टाः प्रवृत्तप्रवेशाश्चादण्ड्याः। अन्यत्र प्रतिषेधात्।
(५) स्ववेश्मनो विरात्रादूर्ध्वं परिवार्यमारोहतः पूर्वः साहसदण्डः। परवेश्मनो मध्यमः। ग्रामारामवाटभेदिनश्च।


अतिचार का दण्ड

( १ ) जो व्यक्ति, किसी ब्राह्मण को अभक्ष्य या अपेय वस्तु खिलाये-पिलाये उसे उत्तम साहस दण्ड दिया जाय। यदि क्षत्रिय को खिलाये-पिलाये तो मध्यम साहस दण्ड, यदि वैश्य को खिलाये-पिलाये तो प्रथम साहस दण्ड और शूद्र को खिलाये-पिलाये तो चौवन पण दण्ड दिया जाय।

( २ ) यदि ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि अभक्ष्य-अपेय वस्तुओं का सेवन करें तो उन्हें देश-निर्वासन का दण्ड दिया जाय।

( ३ ) जो पुरुष दिन में किसी के घर में घुसे उसे प्रथम साहस दण्ड, रात्रि में घुसे तो मध्यम साहस दण्ड और हथियार लेकर रात या दिन में प्रवेश करे तो उसको उत्तम साहस दण्ड दिया जाय।

( ४ ) भिखारी, फेरी वाले, शराबी, उन्मादी, व्यभिचारी, बंधु-बांधव और मित्र आदि एक दूसरे के घर में प्रवेश करें तो दण्डनीय नहीं हैं, बशर्ते कि उनको किसी पारिवारिक व्यक्ति ने रोका न हो।

( ५ ) यदि कोई व्यक्ति एक प्रहर रात बीत जाने पर बाहर से अपने ही घर की दीवार पर चढ़े तो उसे प्रथम साहस दण्ड दिया जाय। यदि इसी हालत में वह दूसरे के घर की दीवार पर चढ़े, और गाँव तथा बगीचों की बाड़ को तोड़े तो उसे मध्यम साहस दण्ड दिया जाय।