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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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के कब्जे में चला गया था ( गुप्त इन्सक्रिप्शन्स, पृ० ८ )। संभवतः उसी समय मद्र लोग उत्तर को छोड़कर दक्षिण में गये, जहाँ उस समय गुप्तों का सुख-संपन्न शासन स्थापित था ( हिन्दू-राजतंत्र, भाग १, पृ० १२६ )। मद्रों की मुठभेड़ समुद्रगुप्त के साथ हुई थी। इसके बाद उनका कोई इतिहास नहीं मिलता है।

मद्रों की एक विशेषता उनके सिक्कों में दिखाई देती है। उन्होंने हस्ताक्षर-युक्त सिक्के चलाये थे। उनका कोई भी ऐसा सिक्का नहीं मिला है, जिस पर किसी प्रकार का लेख न खुदा हो।

कुकुर : कौटिल्य ने जिस राजा-शासित कुकुर संघ का उल्लेख किया है, वह अंधक वृष्णी के संयुक्त संघ का एक अंग था। पश्चिम भारत में प्रथम शताब्दी के अंत में उपलब्ध होने वाले शिलालेखों में कुकुरों का उल्लेख मिलता है ( एपिप्राफिया इण्डिका, भाग ८, पृ० ४४, ६० )। कुकुरों के संबंध में अधिक विवरण उपलब्ध नहीं होता है। संभवतः १५० ई० पूर्व के बाद रुद्र-दामन् का राज्य प्रतिष्ठित हो जाने पर कुकुरों का अस्तित्व उसी में खो गया।

कुरु : कुरुओं का इतिहास बहुत पुराना जान पड़ता है। वैदिक युग में हिन्दू समाज के जिन विभिन्न वर्गों ( विशों ) का उल्लेख मिलता है उनमें कुरुओं का नाम भी आता है। वे स्वयं को आर्य कहा करते थे ( मेकडानल तथा कीथ : वैदिक इण्डेक्स )।

कुरुओं को कौटिल्य ने प्रजातंत्रवादी बताया है; किन्तु ऐतरेय ब्राह्मण ( पृ० ८।१४ ) में कुरुओं और पांचालों को एकराजत्व शासन-प्रणाली वाले संघ बताया गया है। बुद्ध के समय में उनके राज्य का अस्तित्व धुंधला पड़ गया था। संभवतः बुद्ध के बाद और कौटिल्य से पूर्व ही उन्होंने प्रजातंत्र को अपनाया होगा।

पांचाल : पांचालों के संबंध में जैसा बताया गया है कि पहिले वे एक राजस्त्र शासन के पोषक रहे हैं; किन्तु कुरुओं की ही भाँति बुद्ध के निर्वाण के बाद वे भी प्रजातंत्रवादी हो गये थे, जिस रूप उल्लेख कौटिल्य ने किया है। पांचालों का राज्य मौर्यों के उपरान्त भी बना रहा।

काम्बोज : राजा की उपाधि धारण करने वाले उक्त राजसंघों के अतिरिक्त कौटिल्य ने शस्त्र, व्यापार और कृषि द्वारा जीविका-निर्वाह करने वाले गणतंत्रों में काम्बोज, सुराष्ट्र, क्षत्रिय तथा श्रेणी आदि का उल्लेख किया है।

काम्बोजों का मूल स्थान पूर्वी अफगानिस्तान ( काबुल नदी, आधुनिक