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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 348 of 918

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Page 348
२६४कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ तीसरा अधिकरण

(१) बहुपुरुषप्रजानां पुत्राणां यथापितृदत्तं स्त्रीधनमवस्थापयेत् ।
(२) कामकारणीयमपि स्त्रीधनं विन्दमाना पुत्रसंस्थं कुर्यात् ।
(३) अपुत्रा पतिशयनं पालयन्ती गुरुसमीपे स्त्रीधनम् आ आयुःक्षयाद् भुञ्जीत, आपदर्थं हि स्त्रीधनम् । ऊर्ध्वं दायादं गच्छेत् ।
(४) जीवति भर्तरि मृतायाः पुत्रा दुहितरश्च स्त्रीधनं विभजेरन् । अपुत्राया दुहितरः । तदभावे भर्ता ।
(५) शुल्कमन्वाधेयमन्यद् वा बन्धुभिर्दत्तं बान्धवा हरेयुः । इति स्त्रीधनकल्पः ।
(६) वर्षाण्यष्टावप्रजायमानामपुत्रां बन्ध्यां चाकाङ्क्षेत; दश विन्दूं, द्वादश कन्याप्रसविनीम् ।
(७) ततः पुत्रार्थी द्वितीयां विन्देत । तस्यातिक्रमे शुल्कं स्त्रीधनमर्धं चाधिवेदनिकं दद्यात् । चतुर्विंशतिपणपरं च दण्डम् ।


( १ ) यदि किसी स्त्री के कई पुत्र कई पतियों के द्वारा पैदा हुए हों तो उसे चाहिए कि जिस पिता का जो पुत्र हो उसी के नाम उसके पिता की सम्पत्ति नाम-जद करे ।

( २ ) अपनी इच्छा से खर्च करने के लिए प्राप्त हुए धन को भी वह पुनर्विवाह करने से पूर्व अपने पुत्रों के नाम लिख दे ।

( ३ ) पुत्रहीन विधवा अपने पतिव्रत धर्म का पालन करती हुई गुरु के संरक्षण में रहकर जीवन पर्यन्त अपने स्त्रीधन का उपभोग कर सकती है । स्त्रीधन आपत्तिकाल के लिए ही होता है । उसके मरने के बाद उसका बचा हुआ धन उसके उचित उत्तराधिकारियों को मिलना चाहिए ।

( ४ ) पति के रहते हुए यदि स्त्री मर जाय तो उसके निजी धन को उसकी सन्तानें आपस में बाँट लें । यदि लड़के न हों तो धन को लड़कियाँ ही बाँट लें । यदि लड़कियाँ भी न हों तो उसका पति उस धन को ले ले ।

( ५ ) बन्धु-बान्धवों ने जो धन विवाह के समय दहेज के रूप में या दूसरे रूप में उस स्त्री को दिया है उसे वे वापस ले सकते हैं । यहाँ तक स्त्री-धन विषयक नियमों पर विचार किया गया ।

( ६ ) पुरुष को पुनर्विवाह का अधिकार : यदि किसी स्त्री की संतान न होती हो या उसके अन्दर सन्तान पैदा करने की शक्ति न हो, तो पति को चाहिए कि वह आठ वर्ष तक सन्तान होने की प्रतीक्षा करे । यदि स्त्री मरे हुए बच्चे ही जने तो दश वर्ष तक और यदि उसको कन्याएँ ही पैदा होती हों तो पति को बारह वर्ष तक इन्तजार करना चाहिए ।

( ७ ) उसके बाद पुत्र की इच्छा करने वाला पुरुष पुनर्विवाह कर सकता है । जो भी पुरुष इस नियम का उल्लंघन करे उसे दहेज में मिला हुआ धन, स्त्रीधन,