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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 327 of 918

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Page 327

प्र० ५३-५४ : अ० ३५ ] समाहर्ता और गुप्तचरों के कार्य २४३

राभ्यां गृहाणि वर्णकर्मभ्यां कुलानि च । तेषां जङ्घाग्रमायव्ययौ च विद्युः । प्रस्थितागतानां च प्रवासावासकारणमनर्थ्यानां च स्त्रीपुरुषाणां चारप्रचारं च विद्युः ।

(१) एवं वैदेहकव्यञ्जनाः स्वभूमिजानां राजपण्यानां खनिसेतुवनकर्मान्तक्षेत्रजानां परिमाणमर्घं च विद्युः । परभूमिजातानां वारिस्थलपथोपयातानां सारफल्गुपण्यानां कर्मसु च, शुल्कवर्त्तन्यातिवाहिकगुल्मतरदेयभागभक्तपण्यागारप्रमाणं विद्युः ।

(२) एवं समाहर्तृप्रदिष्टास्तापसव्यञ्जनाः कर्षकगोरक्षकवैदेहकानामध्यक्षाणां च शौचाशौचं विद्युः । पुराणचोरव्यञ्जनाश्चान्तेवासिनश्चैत्यचतुष्पथशून्यपदोदपाननदीपानतीर्थायतनाश्रमारण्यशैलवनगहनेषु स्तेनामित्रप्रवीरपुरुषाणां च प्रवेशनस्थानगमनप्रयोजनान्युपलभेरन् ।


परिवार ब्राह्मणों का है या क्षत्रियों का और वे क्या-क्या कार्य करते हैं। वे गुप्तचर यह भी जाने कि उन परिवारों के प्राणियों ( मनुष्यों तथा पशुओं ) का संख्या कितनी है और उनकी आमदनी खर्च के जरिये क्या हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने-आने वाले लोगों और अपने स्थान को छोड़कर दूसरी जगह बस जाने वाले लोगों के सम्बन्ध में, राजा से सम्बन्ध न रखने वाली नर्तकियों, जुआरियों, भाँडों आदि के आवास-प्रवास पर भी वे गुप्तचर निगरानी रखें और यह भी जानें कि शत्रुओं के गुप्तचर कहाँ-कहाँ पर रहकर क्या-क्या कार्य कर रहे हैं।

( १ ) इसी प्रकार व्यापारी के वेष में रहने वाले गुप्तचर ( वैदेहक ) समाहर्त्ता के आदेशानुसार अपने अधिकार-क्षेत्र में उत्पन्न और बेची जाने वाली सरकारी वस्तुओं, खनिज पदार्थों, तालाबों, जंगलों तथा कारखानों से उत्पन्न होने वाली वस्तुओं की तौल एवं कीमत को अच्छी तरह से समझें। विदेशी व्यापारियों ने चुङ्गी, सीमाकर, मार्गरक्षा का कर, नाव कर, अन्तपाल का टैक्स, साझेदारी का हिस्सा, भत्ता, भोजन-व्यय और बाजार आदि का टैक्स कितना दिया है, यह भी वे जानें।

( २ ) इसी प्रकार तपस्वी के वेष में रहने वाले गुप्तचर ( तापस ), समाहर्त्ता की आज्ञानुसार, अपने क्षेत्र में रहने वाले किसान, ग्वाले, व्यापारी और अध्यक्षों की ईमानदारी तथा बेईमानी के रहस्यों को जानें। पुराने चोरों के वेष में रहने वाले उन तापस गुप्तचरों के शिष्य ( पुराणचोर ) देवालय, चौराहा, निर्जन स्थान, तालाब, नदी, कुओं के समीपस्थ जलाशय, तीर्थस्थान, आश्रम, जंगल, पहाड़ और घना जंगल आदि स्थानों में ठहर कर चोरों, शत्रुओं, शत्रुओं के भेजे हुए तीक्ष्ण तथा रसद आदि गुप्तचरों का ठीक-ठीक पता लगायें।