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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

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DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 293 of 918

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Page 293

प्र० ४३ : अ० २७ ] वेश्यालयों का अध्यक्ष २०९

(१) गणिकामकामां रुन्धतो निष्पातयतो वा व्रणविदारणेन वा रूप-
मुपघ्नतः सहस्रदण्डः । स्थानविशेषेण वा दण्डवृद्धिरानिष्क्रयद्विगुणात्
पणसहस्रं वा दण्डः ।
(२) प्राप्ताधिकारां गणिकां घातयतो निष्क्रयात्त्रिगुणो दण्डः । मातृ-
कादुहितृकारूपदासीनां घात उत्तमः साहसदण्डः ।
(३) सर्वत्र । प्रथमेऽपराधे प्रथमः, द्वितीये द्विगुणः, तृतीये त्रिगुणः,
चतुर्थे यथाकामी स्यात् ।
(४) राजाज्ञया पुरुषमनभिगच्छन्ती गणिका शिफासहस्रं लभेत,
पञ्चसहस्रं वा दण्डः ।
(५) भोगं गृहीत्वा द्विषत्या भोगद्विगुणो दण्डः । वसतिभोगापहारे
भोगमष्टगुणं दद्यात्, अन्यत्र व्याधिपुरुषदोषेभ्यः ।


साहस दण्ड देना चाहिए । जो इच्छा करने वाली कुमारी के साथ संभोग करे उसे भी प्रथम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए ।

( १ ) जो पुरुष किसी कामनारहित वेश्या को जबर्दस्ती अपने घर में रोक कर रखे या कोई चोट तथा घाव कर उसके रूप को क्षति पहुँचाये उस पुरुष को एक हजार पण से दण्डित करना चाहिए । शरीर के भिन्न-भिन्न स्थानों को चोट पहुँचाने पर, उन-उन स्थानों की विशेषताओं के अनुसार अधिक दण्ड दिया जा सकता है, यह दण्ड-राशि अड़तालीस हजार पण तक ली जा सकती है ।

( २ ) राजा की सेवा में नियुक्त वेश्याओं को मारने वाले व्यक्ति पर बहत्तर हजार पण दण्ड किया जाय । खाला, वेश्यापुत्री और वेश्या को मारने-पीटने वाले को उत्तम साहस दण्ड दिया जाय ।

( ३ ) पूर्वोक्त सारी दण्ड-व्यवस्था एक बार अपराध करने वालों के लिए निर्दिष्ट है । यदि कोई अपराधी उसी अपराध को दुहराये तो दुगुना दण्ड, तिहराये तो तिगुना दण्ड, और चौथी बार भी उसी अपराध को करे तो चौगुना दण्ड अथवा सर्वस्वहरण, देश निकाला आदि जो भी उचित हो, उसे दण्ड दिया जाय ।

( ४ ) राजा की आज्ञा होने पर यदि कोई वेश्या किसी विशिष्ट व्यक्ति के पास जाने से इनकार कर दे तो उस पर एक हजार कोड़े लगवाये जाँय अथवा उस पर पाँच हजार पण जुर्माना किया जाय ।

( ५ ) यदि कोई वेश्या संभोग-शुल्क ( भाग ) लेकर धोखा कर दे तो उस पर संभोग-शुल्क से दुगुना जुर्माना करना चाहिए । यदि पूरी रात का शुल्क लेकर गणिका किस्सा-कहानियों या दूसरे बहानों में ही सारी रात टाल दे तो उसपर शुल्क का आठ गुना दण्ड किया जाना चाहिए, किसी किसी संक्रामक रोग या किसी दोष

१४ कौ०