सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

कॉपीराइट समस्या बताएँ

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 270, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 270

१४६ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

(१) शुल्कभयात्पण्यप्रमाणं मूल्यं वा हीनं ब्रुवतस्तदतिरिक्तं राजा हरेत् । शुल्कमष्टगुणं वा दद्यात् ।
(२) तदेव निविष्टपण्यस्य भाण्डस्य हीनप्रतिवर्णकेनाघार्यापकर्षणे सारभाण्डस्य फल्गुभाण्डेन प्रतिच्छादने च कुर्यात् ।
(३) प्रतिक्रेतृभयाद्वा पण्यमूल्यादुपरि मूल्यं वर्धयतो मूल्यवृद्धिं राजा हरेत् । द्विगुणं वा शुल्कं कुर्यात् ।
(४) तदेवाष्टगुणमध्यक्षस्य छादयतः ।
(५) तस्माद्विक्रयः पण्यानां धृतो मितो गणितो वा कार्यः । तर्कः फल्गुभाण्डानामानुग्राहिकाणां च ।
(६) ध्वजमूलमतिक्रान्तानां चाकृतशुल्कानां शुल्कादष्टगुणो दण्डः । पथिकोत्पथिकास्तद्विद्युः ।

लगाने पर जो भी खरीद दे, उसे माल दे देना चाहिए, यदि खरीदने वालों में होड़ लग जाय तो माल का मूल्य बढ़ा कर बोली बोली जाय और निर्धारित आमदनी से अधिक मूल्य एवं उसकी चुङ्गी राजकीय कोष में जमा कर दी जाय ।

( १ ) अधिक चुंगी देने के डर से जो व्यापारी अपने माल और उसके मूल्य को कम करके बताये, उस अतिरिक्त माल को राजा ले ले, अथवा व्यापारी से आठ गुना शुल्क वसूल किया जाय ।

( २ ) यही दण्ड उस व्यापारी को भी देना चाहिए जो कि बढ़िया माल की जगह, उसी प्रकार की दूसरी पेटी आदि में घटिया माल रख कर उसका मूल्य कम कर दे अथवा जो व्यापारी नीचे के हिस्से में अच्छा माल भर कर ऊपर से सस्ता माल भर दे और उसी के अनुसार चुंगी दे ।

( ३ ) प्रतिद्वन्द्विता के कारण जो ग्राहक किसी चीज का मूल्य बढ़ा दे, उस बढ़े हुए मूल्य को राजा ले ले अथवा उस मूल्य बढ़ाने वाले खरीद्दार से दुगुनी चुंगी वसूल कर ली जाय ।

( ४ ) मित्रता या रिश्वत के कारण यदि अध्यक्ष किसी अपराधी व्यापारी को माफ कर दे तो अपराध के अनुपात से आठगुना दण्ड अध्यक्ष को दिया जाय ।

( ५ ) इसलिए माल की बिक्री तौल कर अथवा गिन कर भली भांति करनी चाहिए, जिससे छल-कपट न हो सके । कोयला, नमक आदि कम चुंगी वाली वस्तुओं पर अन्दाज से ही कर लेना चाहिए, उन्हें तौलने की आवश्यकता नहीं है ।

( ६ ) जो व्यापारी छिपकर या किसी छल से चुंगी दिए बिना ही चुंगीघर को लांघ कर चले जांय उन्हें नियत शुल्क से आठ गुना अधिक शुल्क देना चाहिए । असली रास्ता छोड़ कर इधर-उधर से निकल जाने वाले लकड़हारे और ग्वाले आदि पर भी निगरानी रखनी चाहिए ।