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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

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DevanagariHindipublished361 pages

Page 94 of 361

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Page 94

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आमपात्र ओप्यासिच्य मौञ्जे त्रिपादे वयोनिद्वे-
शाने प्रबध्नाति ॥ ३२ ॥ अघद्विष्टा शं नो देवी वरणः
पिप्पली विद्रधस्य या बभ्रव इति ॥ ३३॥ उपोत्तमेन पला-
शस्य चतुरङ्गुलेनालिम्पति ॥३४॥ प्रथमेन मन्त्रोक्तं बध्नाति
॥३५॥ द्वितीयेन मन्त्रोक्तस्य सम्पातवतानुलिम्पति ॥३६॥
तृतीयेन मन्त्रोक्तं बध्नाति ॥३७॥ चतुर्थेनाशयति ॥३८॥
पञ्चमेन वरुणगृहीतस्य मूर्धिन सम्पातानानयति ॥३९॥
उत्तमेन शाकलम् ॥४०॥ उद्गातामित्याप्लावयति बहिः
जल से सेक करे ॥ ३१ ॥ कच्चे मिट्टी के पात्र में उक्त शेष चूर्ण को डालकर
और लीप कर मूँज के शिक्य में धर कर मातृ नामक दो सूक्तों में से
किसी एक सूक्त का जप करता हुआ पक्षी के घोसले में बान्ध देवे ॥३२॥
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