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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

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DevanagariHindipublished361 pages

Page 85 of 361

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Page 85

अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ५३


रुपतिष्ठते ॥१८॥ इन्द्रस्य कुक्षिः साहस्त्र इत्यृषभं सम्पात-
वन्तमतिसृजति ॥१९॥ रेतोधायै त्वातिसृजामि वयोधायै
त्वातिसृजामि यूथस्वायै त्वातिसृजामि गणस्वायै त्वाति-
सृजामि सहस्रपोषायै त्वातिसृजाम्यपरिमितपोषायै त्वा-
तिसृजामि॥२०॥ एतं वो युवानमिति पुराणं प्रवृत्त्य नव-
मुत्सृजते सम्प्रोक्षति ॥२१॥ उत्तरेण पुष्टिकाम ऋषभेनैन्द्रं
यजते ॥२२॥ सम्पत्कामः श्वेतेन पौर्णमास्याम् ॥२३॥
सत्यं बृहदित्यग्रहायण्याम् ॥२४॥ पश्चादग्नेर्दर्भेषु ख-
दायां सर्वहुतम् ॥२५॥ द्वितीयं सम्पातवन्तमश्नाति
॥२६॥ तृतीयस्यादितः सप्तभिर्भूमे मातरिति त्रिर्जुहोति
॥२७॥ पश्चादग्नेर्दर्भेषु कशिप्वास्तीर्य विसृग्वरोमित्युप
विशति ॥२८॥ यास्ते शिवा इति संविशति ॥२९॥ यच्छ-


इत्यादि से स्थूणा को पकड़ कर उपस्थान करे । “यददामि०” ऋचा से
वाक् संयम को छोड़ देवे । गृहपत्नी के रंधन घर में बैठकर जलपात्र
को तूष्णीं लावे ।। दूर्वा हाथ में लिये अंजुलि बनाकर “दूर्वापरं ०” इत्यादि
छः ऋचावाले सूक्त का जप करे ॥१८॥ अब वृषोत्सर्ग की विधि को कहते
हैं ।। वृषभ को लाकर विवाह की भाँति अग्नि प्रणयन करके वत्सतरियों
के साथ “इन्द्रस्य कुक्षिः साहस्त्र०” इत्यादि से वृषभ को छोड़े ॥१९॥ “रेतो
धायै त्वा० युवानं” इस अन्त के मंत्रों को पढ़ कर पुराने वृषभ का त्याग
कर नये वृषभ को संप्रोक्षण कर छोड़े ॥२०॥२१॥ पुष्टि की इच्छा वाला
नवीन ऋषभ द्वारा इन्द्र की पूजा करे ॥२२॥ सम्पत् चाहनेवाला श्वेत वृषभ
द्वारा पौर्णमासी को इन्द्र की पूजा करे ॥२३॥ अग्रहायणी पौर्णमासी की
रात में अभ्यातानान्त होम करके चार चरु स्थालीपाक से पकावे । और
“सत्यं बृहत्” इस अनुवाक से अग्नि के पश्चाद् भाग में कुशों पर (भूमि
पर) गढे में एक चरु की एक बार सर्वहुत आहुति देवे ॥२४॥२५॥ दूसरी
चरु सम्पात वाले को खावे और तीसरे को स्थालीपाक से पका कर
“सत्यं बृहत्” इत्यादि सात ऋचा से और “भूमे मातः०” इत्यादि अष्टमी
ऋचा से तीन बार आहुति देवे ॥२६॥२७॥ अग्नि के पश्चिम भाग में वस्त्र