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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

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DevanagariHindipublished361 pages

Page 66 of 361

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Page 66

३४ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
तवर्तीं दर्भरज्ज्वा क्षत्रियायोपासङ्गदण्डे बध्नाति ॥२५॥
द्वितीयामस्यति ॥२६॥ अस्मिन् वस्विति राष्ट्रावगमनम्
॥२७॥ आनुशूकानां व्रीहीणामात्रस्कजैः काम्पलैः शृतं
सारूपवत्समाशयति ॥२८॥ अभीवर्त्तेनेतिरथनेमिमणि-
मयः सीसलोहरजतताम्रवेष्टितं हेमनाभिं वासितं बद्ध्वा
सूत्रोतं बर्हिषि कृत्वा सम्पातवन्तं प्रत्यूचं भृष्टीरभीव-
र्त्तोत्तमाभ्यामाच्योतति ॥२९॥ अचिक्रदद्धा त्वा गन्निति
यस्माद्राष्ट्रादवरुद्धस्तस्याशायां शयनविधं पुरोडाशं
दर्भेषूदके निनयति ॥३०॥ ततो लोष्टेन ज्योतिरा-
यतनं संस्तीर्य क्षीरौदनमश्नाति ॥३१॥ यतो लोष्टस्ततः
संभाराः ॥ ३२ ॥ तिसृणां प्रातरशिते पुरोडाशे व्यह्यन्ते
को पृषदाज्य से सम्पात करके दर्भरज्जु से क्षत्रिय के विश्रामार्थ उर्ध्वज
दण्ड में बांध देवे ॥२५॥ और दूसरी शितिपदी को शत्रु सेना में फेंक देवे
॥२६॥ “अस्मिन्वसु”० से अपने राष्ट्र में प्रवेश करे ॥ जो शत्रु द्वारा
अपने राष्ट्र से निकाला जाकर पुनः अपने राष्ट्र में जाता है उसके लिये
यह प्रवेश विधि है ॥२७॥ आनुशूक ( पहिले बार के काटे जाने पर
फिर उत्पन्न हो ) धान्य ( यव आदि ) के कटने पर श्रपण काठ और
गुण्डारोचन लता से समान रूप रंग के बच्चा वाली गौ के दूध में पका
कर राजा को खिलावे ॥२८॥ रथचक्र के बाहर पुष्टि के अवयव को
मणि के आकार का बनाकर सीसा, लोहा, चान्दी, तामा, इनसे वेष्टित
कर नाभिमणिद्वार को सुवर्ण मणिद्वार बनाकर कस्तूरी से त्रयोदशी
आदि तिथि में बान्ध देवे और सूत से पोहकर कुश पर धरकर “अभी-
वर्त्तोत्तमामुदसोसपत्नक्षयणः” इत्यादि दो ऋचाओं से प्रत्येक ऋचा से
दूध का धार मणि से देवे ॥२९॥ जिस देश से शत्रु राजा द्वारा निकाला
गया हो उस राष्ट्र की ओर के क्षेत्र से व्रीहि, जल, दर्भ आदि लेकर
निवास देश में शयन स्थान में विधि पुरोडाश को करके-कुशों को
बिछाकर मंत्र के अन्त में जल के साथ लावे ॥३०॥ परराष्ट्र की दिशा
से मट्टी का ढेला लेकर चूर्णित करे एवं उसको अग्नि स्थान के उत्तर
भाग में विकिर देवे । जहाँ से मट्टी का ढेला लेवे वहीं से अन्य साधनों