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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

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१४४ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।

शरदे स्वेत्यृतुभ्यः ॥२१॥ उदस्य केतवो मूर्द्धाहं विपासहि-
मित्यद्यन्तमुपतिष्ठते ॥२२॥ मध्यंदिनेऽस्तं यन्तं सकृत्प-
र्यायाभ्याम् ॥२३॥ अंहोलिङ्गानामापो भोजनहवींष्युक्ता-
नि ॥२४॥ उत्तमासु यन्मातली रथक्रीतमिति सर्वासां
द्वितीया ॥२५॥६॥५८॥
विश्वे देवा इति विश्वानायुष्कामो यजते ॥१॥
उपतिष्ठते ॥२॥ इदं जनास इति द्यावापृथिव्यौ पुष्टि-
कामः ॥३॥ सम्पत्कामः ॥४॥ इन्द्र जुषस्वेतीन्द्रं बलकामः
॥५॥ इन्द्रमहमिति पण्यकामः ॥६॥ उदेनमुत्तरं नय योऽ-
स्मानिन्द्रः सुत्रामेति ग्रामकामः ॥७॥ ग्रामसम्पदांना-

देवे ॥२०॥२१॥ “उदस्य केतवो०” इत्यादि अनुवाक से तीनों समय
प्रतिदिन सूर्य्य का उपस्थान करे यदि आयु वृद्धि की कामना हो अर्थात्
सूर्योदय समय, मध्यदिन में और अस्त होते समय भगवान् सूर्य का
उपस्थान करे ॥२२॥२३॥ और अंहोलिङ्गक गण के मंत्रों से जलको
अभिमंत्रण कर पिये, भोजन को अभिमंत्रण कर खावे और हवि को
अभिमंत्रण कर सूर्य्य के नाम आहुत देवे आयुष्कामना वाला किया
करे ॥२४॥ “अग्निं ब्रूम०” सूक्त के “यन्मातली रथक्रीतं०” सब ऋचाओं
के दूसरी ऋचा व्यतिषङ्गसे व्यवहार करे ॥२५॥९॥५८॥ यह अठावनवी
कंडिका समाप्त हुई ॥
अब काम्य कर्मों की विधि को कहेंगे । संभार के लक्षण में मण्डप
विधान कहा गया है । या घर में करे ॥ आयुष्कामना वाला “विश्वे
देवा०” इत्यादि से चरु की आहुति देवे और उपस्थान करे तो उसकी
आयु १०० वर्ष की होगी ॥१॥२॥ “इदं जनासो०” से पुष्टि कामना
वाला और सम्पत्ति चाहने वाला “द्यावापृथिवी” से यज्ञ करे ॥३॥४॥
पुरुषादि बल कामना वाला राजा नित्य “इन्द्र जुषस्व०” इत्यादि से
अग्नि में आहुति करे ॥ ५ ॥ “इन्द्रमहं०” से पण्य .( किसी प्रकार
व्यवसाय) की कामना वाला अग्नि में आहुति किया करे ॥ ६ ॥
“उदेनमुत्तरं०” इत्यादि से ग्राम की इच्छा वाला आहुतियां करे
और उपस्थान करे ॥७॥ ग्राम सम्पत् के लिये पलाश की समिधों का