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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

DevanagariHindipublished361 pages

Page 109 of 361

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Page 109

शति ॥१८॥ उत्तमाभ्यामादित्यमुपतिष्ठते ॥१६॥ इन्द्रस्य
प्रथम इति तक्षकायैस्त्युक्तम् ॥२०॥ पैद्वं प्रकृष्य दक्षिणे-
नाङ्गुष्ठेन दक्षिणस्यां नस्तः ॥२१॥ अहिभये सिच्यवगृह-
यति ॥२२॥ अङ्गादङ्गादित्या प्रपदात् ॥२३॥ दंष्ट्रोत्त-
मया निताप्याहिमभिनिरस्यति ॥२४॥ यतो दष्टः ॥२५॥
ओषधिवनस्पतीनामनूक्तान्यप्रतिषिद्धानि भैषज्यानाम्
॥२६॥ अंहोलिङ्गाभिः ॥२७॥ पूर्वस्य पुत्रकामावतोकयो-
हैं । उसको नीले तथा लाल सूत से दोनों कक्षों में बान्धकर शकुनी की
भांति करे ॥ १७॥ “शीर्षक्ति०” सूक्त से रोगी को अभिमर्शन करे
॥ १८॥ और इस सूक्त के प्रथम दो ऋचाओं से सूर्य का उपस्थान करे
॥ १६॥ एवं “इन्द्रस्य प्रथम ब्रह्मणो यज्ञ०” सूक्त से रक्षक देवको हाथ
जोड़कर प्रणाम करे ॥२०॥ एवं उक्त सूक्त से पैद्वनामक कीट (तालिणी )
को पीसकर अभिमंत्रित करके सर्पदष्ट रोगी के नाक के दहिने छिद्र में
नस्य देवे ॥ २१॥ और जिस घरमें सर्प का भय हो, वहां पैद्व
को सफेद वस्त्र में लपेट करके स्थापित करके उसके सारे अङ्गों को
मार्जन करे । और “आरे अभूत्०” इत्यादि तीन ऋचाओं से उल्मुक को
अग्नि में तपाकर अभिमंत्रण करके विष के जखम को देखकर उस ओर
उल्मुकको छोड़ देवे । सर्प भय एवं सर्प दष्टकी दवा समाप्त हुई ॥२२॥
२३॥२४॥२५॥ कौशिक सूत्रों में जिन सब रोगों की ओषधियाँ कही
गयीं और नहीं कही गयीं उनकी पूर्त्ति में सब रोगों के भैषज्य
को कहते हैं । सब रोगों के उपचार में मंत्र ओषधियां ( वनस्पतियाँ )
और जो २ नहीं कही गयीं या जिनका प्रतिषेध नहीं किया गया—ऐसे
भैषज्यों का ज्ञान “अंहोलिङ्गिक” गण के द्वारा करना चाहिये । जैसे,
“आशानामाशापालेभ्यः”०-यह एक । अंहोलिङ्गगण ॥ और जो २
प्रतीकें कही जाती हैं उनके द्वारा अभिमंत्रण करने से सब रोगों के
भैषज्य होते हैं—उनका वर्णन किया जाता है । “अक्षिभ्यां ते, मुञ्चामि
त्वा, उत देवाः, आवतस्य, शीर्षक्ति ॥ अंहोलिङ्ग गण ॥ इन पांच प्रतीकों
द्वारा या इनमें से किसी एक प्रतीक से अभिमंत्रण करना चाहिये ॥
अंहोलिङ्गगण । ( यह सब रोगों की दवायें हैं ) या उन सब सूक्तों द्वारा