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कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

by महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह)

DevanagariHindipublished361 pages

Page 103 of 361

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Page 103

अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ७१
शाकफलानि प्रयच्छति ॥४॥ क्षीरलेहमाङ्क्ते ॥५॥ अश्ना-
ति ॥ ६॥ अग्नेरिव इत्युक्तं दावे ॥ ७॥ इमा यास्तिस्र
इति वृक्षभूमौ जाताज्वालेनावसिञ्चति ॥ ८ ॥ शीर्ष
फाण्टाङ्गैः ॥ ६॥ निकटाभ्याम् ॥ १० ॥ कृष्णं नियानम-
ह्योषध्याभिश्चोतयते ॥ ११ ॥ मारुतानामप्ययः ॥ १२ ॥
हिमवत इति स्यन्दमानादन्वीपमाहार्य वलीकैः ॥ १३ ॥
पञ्च च या इति पञ्चपञ्चाशतं परशुपर्णान्काष्ठैरादीप-
यति ॥१४॥ कपाले प्रश्रुतं काष्ठेनालिम्पति ॥१५॥ किं-
फलों को रोगी को देवे और उसकी आँखों में क्षीरपाटिकालग्न मूल
क्षीर को प्राशन करा के क्षीर के लेह को आँखों में आँजे ॥५॥ ६॥
पित्त ज्वर की दवा को कहते हैं । “अग्नेरिव०” सूक्त से दावाग्नि में
अग्नि प्रणयन करके उस में ताम्बे के स्रुवा से रोगी के शिर पर सम्पात
को गिरावे ॥ ७॥ केशों के गिरने एवं बढ़ने की दवा को कहते हैं ॥ वृक्ष
भूमि पर उत्पन्न औषधियों को जलाकर उससे जल गर्म करके अभिमंत्रण
कर के प्रातः काल रोगी को अवसिंचन करे ॥ ८ ॥ “निकटावनिकटा-
भ्यां०” सूक्तों से मधु और बहेड़ का काथ बनाकर रोगी को उषः काल में
अवसिंचन करे ॥ ९ ॥ दारु हल्दी और हल्दी का काथ बना कर अभि-
मंत्रण करके उषः काल में रोगी को अवसिंचन करे ॥ १० ॥ अब उदर
तुण्ड बीमारी की दवा को कहते हैं॥ “कृष्णं नियानं०” एवं “सस्रुषीः”
इत्यादि दो सूक्तों से चिति आदि ओषधियों के सहित जल को अग्नि
में गरम करके उषः काल में रोगी को अवसिंचन करे ॥ ११ ॥ “कृष्णं
नियानं, सस्रुषीः” इन दो सूक्तों से एवं “मरुतो यजते०” से पाकयज्ञ
विधान से और “यथा वरुणं मारुतं क्षीरौदनं मारुतशृतं इत्यादि मारुत
सूक्तोक्त मंत्रों का उपयोग करे ॥ १२ ॥ अब हृदयदाह, जलोदर, कामला
रोगों की दवा को कहते हैं ॥ नदी के अनुकूल प्रवाह के जल को रोक
कर उस में छप्पर के तृणों को डाल कर रोगी को अवसिंचन करे
॥१३॥ अब गण्डमाला रोग की दवा को कहते हैं । “पञ्च च या” सूक्त से
पलाश के ५५ पत्तों को लकड़ी से जलाकर कपाल में पर्ण काठ के रस
को पकाकर पलाश के काठ से लेकर रोगी को लेपन करे और अवसे-