कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)
Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary
महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा
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XXVI, 3, १३-5, ८ कौषीतकिब्राह्मणे 132
।१२। ताभिर्वशममहस्तायते$^{11}$ ।१३। अन्तः$^{12}$ षष्ठमहः ।१४। अथ पुनस्ततिरेव सप्तममहः
।१५। तस्मात् ततवन्ति सप्तमेऽहन्त्सूक्तानि शस्यन्ते प्रायणीयरूपेण ।१६। पुनःप्रायणीयं
हि सप्तममहः ।१७ ॥३॥
$^1$ L. P. °प्लुवन् $^2$ L. P. तान् $^3$ P. आसान् $^4$ L. P. अथैतौ $^5$ L. °र्विंशः स्तोमो
$^6$ L. (var.) तथा (for अथ) $^7$ IO. BM$^1$. °र्विंश $^8$ ER. °ममुपु° $^9$ L. तास्त
$^{10}$ L. P. षड्ढतवः $^{11}$ L. P. Here ends Khaṇḍa 7 $^{12}$ L. P.