कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)
Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary
महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा
DevanagariSanskritpublished119 पृष्ठ
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Yes, "ऋतुर्जन्त्रीयं" (ऋ-त-ु-र्-ज-न-्-त-्-र-ी-य-ं).
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125 विषुवत् XXV, 7, ३६-9, ८
Text:
L28: तेन रूपेण ॥३५॥ ताश्चतुश्चत्वारिंशत् ॥३६॥ पतङ्गास्तिस्रस्ताः सप्तचत्वारिंशत् ॥३७॥
L29: उरुं नो लोकमनु नेषि विद्वानिति त्रिःशस्तया परिधानीयया ताः पञ्चाशत् ॥३८॥ पूर्वा
L30: एकपञ्चाशतं ॥३९॥ ता एकशतगृचो भवन्ति तासामुक्तं ब्राह्मणम्¹¹ ॥४० ॥7॥
Footnotes:
¹ L. P. omit ² L. P. ॰दत्रैव ³ L. P. ॰यतीति ⁴ L. P. Here ends Khaṇḍa 7
⁵ L. P. कौषीतकी; L. (var.) as here ⁶ L. P. omit त्रयोदशर्चम्; read उद्बृह् (for उद्भूत);
L. (var.) as here ⁷ L. P. add सर्वहरेर्वां ⁸ L. P. सर्वहरेर्वां ⁹ P. ॰नस्तिंश