कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)
Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)
by स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा
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Read in contextपरिचय
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शिक्षित भारतवासी मात्र श्रीयुत स्वामी विवेकानन्द के नाम और काम से परिचित हैं। आपने वङ्ग-भूमि को अपने जन्म से पवित्र किया था और वहीं सामयिक उच्च शिक्षा प्राप्त की, जिससे आपके मानसिक भाव तो उन्नत हुए परन्तु आत्मा की तुष्टि न हुई। अपने जीवनोद्देश के अन्वेषण में आप व्यग्र थे ही, इसी अवसर में दैवसंयोग से अथवा भारत के सौभाग्य से आपको परमहंस स्वामी रामकृष्ण जैसे सद्गुरु का आदर्श मिल गया। जैसा आपका उद्देश उच्च था वैसा ही उच्च आदर्श भी आपको मिला। महात्मा रामकृष्णजी के उपदेश और आदर्श से आपके हृदय में ज्ञान का प्रकाश हुआ और आप सांसारिक मोह के आवरण को उल्लंघन करके यथार्थ में स्वामी विवेकानन्द बन गये।
संन्यास धारण करने के पश्चात् उक्त स्वामीजी ने पश्चिम की यात्रा की। आपकी इस यात्रा का उद्देश यह था कि अध्यात्म-विद्या की उस अमृत-धारा से (जिसका स्रोत और केन्द्र सनातन काल से भारतवर्ष रहा है) पाश्चात्य भूमि को (जो प्रकृतिवाद या देहवाद के वायु से शुष्क हो रही थी) संसिक्त और आप्लावित करें। कैसा पवित्र उद्देश था। इसके लिए उक्त महात्मा ने यूरोप और अमेरिका आदि प्रान्तों में जो कुछ उद्योग और यत्न किया,