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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariHindipublished259 pages

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सप्तम अध्याय-३ ] [ ४१६
नृत्य-गान मे तत्पर हुए तथा देवता, मुनिगण, सिद्धगण और चारणादि
प्रसन्न हृदय मे पुष्प बरसाने लगे ।३१। कोक-विकोक का सहार हुआ
देख कर कवि ने उत्साह पूर्वक अपने दैत्य शत्रु-पक्ष के दस हजार महा-
रथियो को नष्ट कर दिया ।३२। प्राज्ञ के द्वारा एक लाख वीर सैनिको
और सुतन्त्रक के द्वारा पच्चीस रथी मृत्यु को प्राप्त हुए ।३३। इसी
प्रकार गर्ग्य, भर्ग्य और विशालादि ने भी निषाद, म्लेच्छ और बर्बरो का
क्रोध पूर्वक सहार कर दिया ।३४। इस प्रकार विजय को प्राप्त हुए
कल्किजी अपनी विशाल सेना के सहित युद्ध के निमित्त आगे बढ़े । उस
समय अनेक प्रकार के बाजे बजने लगे । श्रेष्ठ शस्त्रास्त्र धारी वीर उनके
साथ-साथ चल रहे थे । अनेक प्रकार के वाहन उस सेना मे आ गये थे ।
सब ओर से कल्किजी पर चमर ढोरे जा रहे थे ।३५-३६।