कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextतृतीयांश-
चतुर्थ अध्याय
रामात्कुशोऽभूदतिथिस्ततोऽभून्निषधान्नभ ।
तस्मादभूत्पुण्डरीक' क्षेमधन्वाऽभवत्तत ।१।
देवानीकस्ततो हीन' परिपात्रोऽथ हीनत ।
बलाहकस्ततोऽकंश्र्च रजनाभस्ततोऽभवत ।२।
खगणाद्विधृतस्तस्माद्धिरण्मनाभसङ्गित' ।
तत पुष्पादध्रुवस्तस्मात्स्यन्दनोऽथा म्नवणक. । ३।
तस्माच्छीघ्रोऽभवत्पुत्र पिता मेऽतुलविक्रम. ।
तस्मान्मरु मां केऽपीह बुधउच्चापि सुमित्रकम् ।४।
कलापग्राममासाद्य विद्धि सत्तपसि स्थितम् ।
तवावतार विज्ञाय व्यासात्सत्यवतीसुतात् ।
प्रतीक्ष्य काल लक्षाब्द कले प्राप्तस्तवान्तिकम् ।
जन्मकोट्य घसा राशेर्नाशन वमंशासनम् ।
वंश'कीर्तिकर सर्वकामपूर परात्मन ।६।
उन श्रीराम के पुत्र कुश हुए। कुश के अतिथि, अतिथि के
निषध, निषध के नभ, नभ के पुण्डरीक और पुण्डरीक के पुत्र क्षेमधन्वा
हुए ॥१॥ क्षेमधन्वा के पुत्र देवानीक, देवानीक के हीन, हीन के परि-
पात्र, परिपात्र के बलाहक, बलाहक के अर्क और अर्क के पुत्र रजनाभ
हुए ॥ २।। रजनाभ के खगण, खगण के विधृत, विधृत के हिरण्यनाभ,
हिरण्यनाभ के पुष्प, पुष्प ध्रुव, के ध्रुव के स्यन्दन और स्यन्दन के पुत्र
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