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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariHindipublished259 pages

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Page 129

३८२ ] [ कल्कि पुराण
ऋतुपर्णास्तत्सुतोऽभूत्सुदासस्तन्सुतोऽभवत् ।
सौदासस्तत्सुतो धीमानश्मकस्तत्सुतो मत ॥२०॥
मूलकात्स दशरथस्तस्मादेडविडस्तत ।
राजा विश्वसहस्तस्मात्खट्वाङ्गो दीर्घबाहुकः ॥२१॥
ततो रघुरजस्तस्मात्सुतो दशरथःकृती ।
तस्माद्रामो हरिः साक्षादाविर्भूतो जगत्पति ॥२२॥
अंशुमान के पुत्र दिलीप, दिलीप के परम प्रसिद्ध पुत्र भगीरथ
हुए । वही भगवती जाह्नवी को भूतल पर लाये थे इसी लिए गंगा
उनके नाम से भागीरथी कहलाई । आपके चरणों से उत्पन्न होने के
कारण ही प्राणी इन गंगा जी की स्तुति, प्रणाम तथा पूजन करने में
तत्पर रहते हैं ।।१८।। भागीरथ का पुत्र नाभ हुआ । नाभ का महाबली
सिन्धुद्वीप और सिन्धुद्वीप का पुत्र आयुतायु हुआ ।।१६।। अयुतायु का
पुत्र ऋतुपर्ण हुआ । ऋतुपर्ण का सुदास, सुदास का सौदास और
सौदास का पुत्र मेधावी अश्मक हुआ ॥२०॥ अश्मक से मूलक और
मूलक का दशरथ हुआ । दशरथ का एडविड, और एडविड का विश्वसह,
विश्वसह का खट्वाग और खट्वाग का पुत्र दीर्घबाहु हुआ था ॥२१॥
दीर्घबाहु के पुत्र रघु हुए, रघु के अज और अज के दशरथ हुए । इन्हीं
दशरथ के पुत्र रूप मे साक्षात् जगदीश्वर विष्णु ने अवतार लिया ॥२२॥
रामावतारमाकर्ण्य कल्कि परमहर्षित ।
मरु प्राह विस्तरेण श्रीरामचरित वद ॥२३॥
सीतापते कर्म वक्तुं कः समर्थोऽस्ति भूतले ।
शेषः सहस्त्रवदनैरपि लालायितो भवेत् ॥२४॥
तथापि शेमुषी मेऽस्ति वर्णयामि तवाज्ञया ।
रामस्य चरितं पुण्यं पापतापप्रमोचम् ॥२५ ॥
अब्जादिविबुधार्थितोऽजनि चतुर्भिरंशैः कुले
रवेरजासुतादजो जगति यातुधानक्षयः।
शिशुः कुशिकजाध्वरक्षमकरक्षयो यो बला-
द्दवलीललितकन्धरो जयति जानकीवल्लभः ॥२६॥