कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextप्रथम अध्याय ३ ] [ ३८१
जोड कर बिनय पूर्वक अपने वंश का यश-वर्णन करने लगे ॥ १२ ॥
सर्ववेत्तिस परात्मापि अन्तर्यामिन्हृदि स्थिति ।
तवाज्ञया सर्वमेतत्कथयामि श्रृणु प्रभो । १३॥
तव नाभेरभूद्ब्रह्मा मरीचिस्तत्सुतोऽभवत् ।
ततो मनुम्तत्सुतोऽभूदिक्ष्वाकु सत्यविक्रम ॥१४॥
युवनाश्व इति ख्यातो मान्धाता तत्सुतोऽभवत् ।
पुरुकुत्सस्तत्सुतोऽभूदनरण्यो महामतिः ॥१५॥
त्रसदस्यु. पिता तस्माद्धर्य्यश्वश्चायरुणस्तत ।
त्रिशङ्कुस्तत्सुतो धीमान्हरिश्चन्द्रः प्रतापवान् ॥१६॥
हरितस्तत्सुतस्तस्माद्भरुकस्तत्सुतो वृकः ।
तत्सुत सगरस्तस्मादसमञ्जास्तोऽशुमान् ॥१७॥
मनु बोले — हे प्रभो ! आप तो अन्तर्यामी एव घट-घट मे
निवास करने वाले है, आपको सब कुछ ज्ञात है। मै आपकी आज्ञा के
अनुसार सब कहता हूँ, उसे सुनिये ॥१३॥ आपके नाभि कमल से ही
ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए हैं । ब्रह्मा के पुत्र मरीचि, मरीचि के मनु और
मनु के सत्य विक्रम इक्ष्वाकु हुए । १४॥ इक्ष्वाकु का पुत्र युवनाश्व,
युवनाश्व का मान्धाता, मान्धाता का पुरुकुत्स और पुरुकुत्स का पुत्र
अनरण्य हुआ ॥१५॥ अनरण्य का त्रसदस्यु, त्रसदस्यु का हर्यश्व,
हर्यश्व का अरुण, अरुण का त्रिशंकु हुआ तथा त्रिशंकु के पुत्र महा-
प्रतापी राजा हरिश्चन्द्र हुए ॥ १६॥ राजा हरिश्चन्द्र का पुत्र हरित,
हरित का भरुक, भरुक का वृक, वृक का सगर, सगर का असमजा और
असमजा का पुत्र अं शुमान हुआ ॥१७॥
ततो दीलीपस्तत्पुत्रो भगीरथ इति स्मृतः ।
येनानीता जन्हवीयं ख्याता भागीरथी भुवि ।
स्तुता नुता पूजितेय तव पादमुसद्भवा ॥१८॥
भगीरथात्सुतस्तस्मान्नाभस्तस्मादभूद्बली ।
सिन्धुद्वीपसुतस्तस्मादायतायुस्ततोऽभवत् ॥१९॥