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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 89 of 442

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Page 89

९० શ્રીકાલિકા પુરાણ
सहस्राक्ष, गौतम, पूर्व भाग में अवस्थित सनत्कुमार, आत्रेय, भार्गव,
विनतासुता, मरुद्गण साध्य, आग्नेय जातवेदा को देखा था। काल,
चित्रगुप्त, कुम्भयोनि, गालव, समस्त विश्वेदेवा, कव्यवाह आदि पितृगणों
को देखा था। समस्त अग्निष्वात आदिक को और चारों प्रकार के
भूतग्राम को, सौम, प्रेतगणों को, दक्षिण दिशा में अवस्थित सिद्धों को
देखा था। वहाँ पर शम्भु ने राक्षसों को, पिशाचों को, भूतों को, मृग,
पक्षियों को, कव्यादों को, क्षुद्र जन्तुओं को तथा पुण्य जनेश्वर को देखा
था। महर्षि मौद्गल को, नैऋत्य दिशा में राहु को तथा किन्नरों को,
महारों को, नक्रों को, मत्स्यों को, ग्राहों को, कच्छपों को, सात समुद्रों
को, सिन्धु को, नदियों को, तीर्थों को और गुह्यकों को देखा था।
मानस आदि सब मनुओं को तथा गंगा नदियों को, कामदेव को,
मधु को, बसन्त को और अनुगों के सहित वरुण को देखा था।
शनैश्चर को, समस्त पर्वतों को जो पश्चिम दिशा में व्यवस्थित थे।
प्राणादि पाँचों वायुओं और गणों के सहित समीरण को, कल्पद्रुमों को,
हेमवान् पर्वत को और महामुनि कश्यप को देखा था। वायव्य दिशा में
कमल व्रति को और फलों को तथा कलानिधि को, अनेक रत्नों को,
हेमों को, मनुष्यों को तथा पर्वतों को देखा था। हिमाद्रि जिनमें प्रमुख
था और यज्ञ, स्थूल, कर्णादि, बुध, नर, कुबेर के सहित नरवाह
यक्षराज, ध्रुव, धर और सोम, विष्णु, अनिल और अनल, प्रत्यूष, प्रभास
इन सबको कौवेरी दिशा में समवस्थित हुए देखा था। वृषभध्वज के बिना
समस्त रुद्रों को, जीवों को तथा मनुओं को, विविध बाहु से संजात
वैश्यों को और सभी ओर शूद्रों को देखा था। ऐशानी दिशा में विविध
भाँति के अन्नों को, ब्रीहियों को, तिलों को भी देखा था। ऐशानी और
पूर्व दिशा के मध्य में सशत व्रतों से संयुत ब्रह्मर्षियों को देखा था।
चारों महर्षियों को, वेदों को और छै वेदों के अंगों को देखा था।
नैऋत्य और पश्चिम दिशा के अन्तःस्थित आनन्द श्वेत पर्वत को देखा
था। सहस्र काद्रवेय के सहित सात भोगियों को, वहाँ पर ही केतु की
ओर डाकिनियों से समन्वित कूष्माण्ड को देखा था तथा नाना वर्णों से