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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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൘൘ श्रीकालिका पुराण ൘൘ ७१
उसी भाँति देखा था। कदाचित् वैष्णवकाय अर्थात् विष्णु का शरीर
ब्रह्मकाय में अर्थात् ब्रह्मा के शरीर में लय हो जाता है। किसी समय
में ब्रह्म वैष्णव में तथा शाम्भव वैष्णवकाय लीन हो जाता है। तात्पर्य
यह है कि कभी ब्रह्मा का शरीर विष्णु के शरीर में और शम्भु के शरीर
में विष्णु का शरीर लय को प्राप्त हो जाया करता है।
शम्भु का शरीर विष्णु के वपु में अथवा ब्रह्मा का वपु शम्भु के
शरीर में लीनता को प्राप्त होता हुआ तथा बार-बार एकता को प्राप्त
होने वाला शम्भु भगवान् ने देखा था। वामदेव की भिन्नता को अप्राप्त
पृथक्गत परमात्मा में गमन करते हुए अर्थात् लीनता को प्राप्त होते हुए
उसके वपु को स्वयं देखा था। शम्भु ने उसके मध्य में जल में वितत
अर्थात् विस्तृत पृथ्वी को देखा था। जो महान् पर्वतों के संघातों से
विरल है। फिर उन्होंने आदि से सर्ग की रचना करते हुए ब्रह्माजी को
देखा था तथा अपने आपको पृथक्भूत और गरुड़ पर आसन वाले
विष्णु को देखा था। वहाँ पर ही प्रजापति दक्ष को और उसी भाँति
अपने गणों को, प्ररीचि आदि दशों को, वैरिणी को, सती, सन्ध्या,
रति, कन्दर्प, वसन्त के सहित श्रृंगार, हावों को, भावों को, मारों को,
ऋषियों को, देवों को, गरुड़ गणों को देखा था। मेघों को, चन्द्र, सूर्य,
वृक्षगण, वल्ली और तृण, सिद्ध, विद्याधर, यक्ष, राक्षस और किन्नरों
को देखा था।
मनुष्यों को, भुजंगों को, ग्राह, मत्स्य, कच्छप, उल्का, निर्घात,
केतुकों को, कृमि, कीट और पतंगों को देखा था। वहाँ पर किसी
वनिता को देखा था जो द्वन्द्व भाव को कर रही थी। किसी को उत्पन्न,
उत्पत्ति को प्राप्त होते हुए विपद्ग्रस्त को देखा था। कुछ लोगों को
हास-विलास करते हुए और कुछ को विलाप करते हुए तथा कुछ दौड़
लगाते हुओं को परमेश्वर ने देखा था जो कि शम्भु की ओर ही भाग
रहे थे। कुछ लोग दिव्य अंलकारों से युक्त थे, कुछ माला और चन्दन
से चर्चित हुए थे, कुछ लोग वीक्षा करते थे और कुछ पुनः शम्भु के
साथ क्रीड़ित थे। कुछ लोग स्तुति कर रहे थे, कुछ शम्भु का स्तवन