कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in contextथा। उद्यत आयुधों वाला होकर इसने उसकी सप्त अक्षौहिणी सेना को
चारों ओर से घेर कर जितनी भी शत्रु की सेना थी उसको आक्रान्त कर
दिया था।
विजय का जो सेनानी था उसका नाम संजय था और वह रिपुओं
का जीतने वाला था। नागों की सेना के द्वारा उसने सैनिकों के सहित
रुमणवान् को ग्रहण किया। उन दोनों वीर सेनानियों का बहुत भारी
युद्ध हुआ था। इसके अनन्तर रुमणवान् ने शूरों की ही भाँति बड़ी भारी
गर्जना करते हुए ही बीस वाणों के द्वारा उसके धनुष को छिन्न कर
दिया था। कृत हस्त की तरह क्षुरप्र के द्वारा उसके धनुष को छिन्न कर
दिया था। उस सञ्जय ने भी उसी समय में धनुष लेकर तीन वाणों के
द्वारा प्रहार किया था। वाणों से वेधन किया था और भाले से उसी
क्षण में धनुष को काट दिया। आठ सौ हाथियों और तीन सहस्र अश्वों
को सञ्जय ने अपने चारों ओर सुदारुण वाणों की वर्षा से शीघ्र ही मार
गिराया था। इसके अनन्तर दूसरी ओर से धनुष ग्रहण करके बहुत ही
अधिक कुपित हो गया था और भाले के द्वारा इसके सारथी का शिर
शरीर से काटकर अलग गिरा दिया था।
इसके अश्वों का चार वाणों के द्वारा विहनन कर दिया था। चतुर
ने पाँच वाणों से सञ्जय को बेध दिया था। उसी क्षण में सञ्जय ने
गदा लेकर अत्यन्त वेग से रथ से उतरकर रुमणवान् पर धावा बोल
दिया था। उस आक्रमण करने वाले सञ्जय को द्रुतहस्त्वत् रुमणवान
ने शरीरों की वर्षा के द्वारा संच्छादित करके सञ्जय को वारित कर
दिया था। इसने गदा के फिराने से सिंह जैसे महान् गज हटा दिया
करता है उसी भाँति शरों की वर्षा करने वाले रुमणवान् को हटाकर
उसके समीप से प्राप्त हो गया था। सञ्जय ने उसके पास पहुँचकर उस
बड़ी भारी गदा को अविद्ध करके अपने एक ही प्रहार के द्वारा रथ के
सहित उसको व्यायोधित कर दिया था। गदा से हत होकर वह महान्
वीर पृथ्वी में गिरा गया था। जैसे वन के मध्य में स्थित शाल का
प्रफुल्ल वृक्ष वज्र से हत होकर गिर जाया करता है। राजा सुदर्शन ने