कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context३९० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
के लिए न दिखावे । पानी में अपने मुख को न देखे, पर्वों में माँस न
खावे । खर, उष्ट्र, वासी और गुव्विणी पर आरोहण न करे । इस
प्रकार से नये शास्त्र से संयुत राजा चतुरंग को वर्धित करता हुआ अपने
आप की निरन्तर रक्षा करके सदा वीर्य का वर्द्धन करे । जो भक्ष्य बीज
के क्षय करने वाला होवे उसकी, भोज्य को, पानक, क्षार, शाक
आदि, बहुत खट्टे और बहुत तिक्त, (चरपरा) का वर्जन कर देना
चाहिए । कांसे के पात्र में और चाँदी के पात्र में स्थित तथा नदी का
जल मूत्र की वृद्धि करने वाला है तथा वीर्य के क्षय करने वाला है
इसको वर्जित कर देवे । ताम्र, लोहा, सुवर्ण, शीशा के पात्र में स्थित
तथा फल और चर्म में स्थित जल वीर्य की वृद्धि करने वाला होता है
ऐसे ही जल का यत्नपूर्वक सेवन करना चाहिए । सम्पूर्ण मूल कृत्यों में
और सदाचारों में स्थित रहने वाला इस लोक में अनेक भागों का
उपभोग करके परम इन्द्र के स्थान को प्राप्त किया करता है ।
मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-मुनियों में परम श्रेष्ठ और्व ने इस रीति
से राजा सगर को शासित किया था और उन्होंने सब शास्त्रों को गुह्यकों
को और सदाचारों को बहुत बार महात्मा सगर राजा को कह कर सुना
दिया । राजनीति, सत्पुरुषों की नीति और जो भी कुछ शास्त्रों में सम्भव
है संहिताओं में पुराणों में और जो आगमों के समुदाय में हैं राजा सगर
ने सभी कुछ धीमान् और्व के मुख से श्रवण किया था । हे द्विजश्रेष्ठ!
उनका कुछ उद्धृत करके कहा था । राजनीति, सदाचार, वेदों और वेदों
के अंगशास्त्रों से संगत विष्णु का रहस्य है । हे द्विज श्रेष्ठों उसका
वीक्षण कर लें । अन्य स्थल में जो नहीं कहा है अथवा संशय के सहित
का है, हे द्विजो! उनमें आप लोगों के लिए सम्पूर्ण संशयों का छेदन
करने वाला कालिका पुराण है । जो विप्र इसका निरन्तर अभ्यास
किया करता है वह वेदों के पठन का फल प्राप्त किया करता है ।
सदाचार वर्णन
ऋषियों ने कहा-संक्षेप से सदाचार और राजनीतियों में विशेष जो
और्व ने राजा से जिस तरह से कहा था वह आपके वचन से श्रवण