Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 379 of 442

Read in context
Page 379

३८२ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
शकध्वजोत्सव वर्णन
और्व ने कहा-इससे अनन्तर हे राजेन्द्र! अतएव आप शक्रोत्थान
ध्वजोत्सव का श्रवण कीजिए जिसको सम्पादित करके राजा किसी
समय में भी पराभव की प्राप्ति नहीं किया करता है । हरिस्थ परिवार
के दिन श्रवण से युक्त द्वादशी तिथि में राजा को इन्द्रदेव का समाराधन
करना चाहिए । इसको भली भाँति करने से सब प्रकार के विघ्नों की
उपशान्ति हुआ करती है । राज परिवार नाम वाला जिसका वासु नाम
दूसरा है, नृप इसे करे । यह पिछले समय में अतुल यज्ञ प्रवृत्त हुआ
था । नभ मास में, वर्षा ऋतु में, द्वादशी तिथि में, शुक्ल पक्ष में,
पुरोहित बहुत प्रकार के वाद्यों और तूर्यों से समन्वित हो । सबसे प्रथम
इन्द्र के केतु के लिए वृक्ष को आमन्त्रित करके उसको वर्धित करना
चाहिए । सम्वत्सर और वार्धकि मंगल कौतुक किया हुआ हो । उद्यान
में, देवता के आगार में, श्मशान में और मार्ग के मध्य में जो भी तरुवर
समुत्पन्न हों उनका वायस ध्वज में वर्जन कर देना चाहिए । जो बहुत
वल्लियों से संयुत हो, शुष्क हो, बहुत से काँटों से समन्वित हो, कुब्ज
अर्थात् टेढ़ा हो वृक्षादनीय युक्त हो तथा लताओं से छन्न तरु हो उसका
परित्याग कर देना चाहिए ।
जो वृक्ष पक्षियों के निवास से समाकीर्ण हो अर्थात् जिस पर बहुत
से पक्षियों के घोंसले हों, जो बहुत कोटरों से समन्वित हो, जो वायु
और अग्नि से विध्वस्त हो गया हो ऐसे तरु को यत्नपूर्वक वर्जन कर
देवे । जिन वृक्षों का नाम नारी वाला हो, जो अत्यन्त छोटा हो, जो
बहुत ही कृश हों । ऐसे इन सभी वृक्षों का धीर पुरुष इन्द्र के पूजन
में सदा ही वर्णन कर दे । अर्जन, अश्वकर्ण, प्रिय कोषरु, औदुम्बर,
ये पाँच वृक्ष केतु के लिए उत्तम बताए गए हैं, और अन्य देवदारु आदि
तथा शाल आदि वृक्ष जो भी प्रशस्त हैं उनका परिग्रहण करना चाहिए
और जो अप्रशस्त हैं उनका कभी भी ग्रहण न करे । वृक्ष को पकड़
करके रात्रि में स्पर्श करके इस निम्न कथित मंत्र का पाठ करना
चाहिए, जो प्राणी वृक्षों पर है उनके लिए कल्याण हो और आपको