Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 374 of 442

Read in context
Page 374

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ३७७
गया है । वह पंचमुख कहा गया है जो महादेव के स्वरूप का धारण
करने वाला है । घर को पाँच मुखों में पंचवक्त्र स्वयं स्थित है । दिशा
के अनुसार वामदेव आदि नाम से भली भाँति स्थित हैं । मण्डप के
पद्म के अन्दर पञ्चवक्त्र घट का न्यास करना चाहिए । पूर्व की ओर
क्षितीन्द्र का न्यास करके पश्चिम में जल सम्भव का न्यास करे । सोम
का यजन उत्तर में करे तथा सौर का न्यास दक्षिण में करना चाहिए ।
इस रीति से कलशों का न्यास करके उनमें इनका विचिन्तन करे ।
कलशों के मुख में ब्रह्मा है और उनकी ग्रीवा में शंकर स्थित रहते हैं ।
मूल में भगवान् विष्णु संस्थित है और मध्य में मातृगण विराजमान हैं ।
दिक्पाल सब देवता दशों दिशाओं को वेष्टित किया करते हैं ।
कुक्षि में सात सागर हैं और सात द्वीप संस्थित हैं । नक्षत्र, समस्त ग्रह
तथा कुल पर्वत गंगा आदि नव नदियाँ, चारों वेद कलम में ये सभी
विराजमान रहते हैं । रत्न, सब बीज, पुष्प, फल, वज्र, मौक्तिक,
वैदूर्य, महादृम, इन्द्र स्फटिक से युक्त सर्वधाममय विम्ब, नागरोहुम्वर,
बीजपूरक, जम्बीर, काश्मीर, आम्रत, दाड़िम, यश, शाली, नीवार,
गोधूम, जितसर्षय, कुंकुम, अगुरु, कपूर, मदन, रोचन, चन्दन, माँसी,
एला, कुष्ठ, कस्तूरी, पत्र, चूर्ण, जल, निर्यास, काम्बुद, शैलेय, बदर,
जातीपत्र, पुष्प, काल शाक, पृक्वा, देवीपणक वचा, धात्री, मंज्जिष्ठा,
मंगलाष्टक, दूर्वा, मोहिनका, भद्रा, शतावरी वर्णों की सरला, क्षुदास्रह,
देवी, गजाह्वा, पूर्ण, कोषासिता, पीठा, गूंजा, शिर, सक, अनल,
व्यामक, गजदन्त शतपुष्प, पुनर्नवा, ब्राह्मी, देवी, रुद्रा, सर्वसन्धानि इन
सबका समाहरण करके कलशों में निर्धापति करना चाहिए । कलश के
देश के अनुसार, ब्रह्मा, शम्भु, गदाधर का क्रम के अनुसार पूजन करके
मुख्यता से भगवान् शम्भु का यजन करना चाहिए । प्रासाद मन्त्र के
द्वारा शम्भु का और तन्त्र के द्वारा शंकर का प्रथम मध्य में अनेक प्रकार
के नैवेद्यों के निवेदन द्वारा पूजन करना चाहिए । दिक्पालों के घटों में
ही दिक्पालों का अर्चन करे । पूर्व में बाहर स्थापित कलशों में ग्रहों का
पूजन करना चाहिए ।