कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in contextसमुदायों का, पायस, स्वादु फल और मोदक तथा यावक देवे । उस
स्थान से भी भूतों को मन्त्र का उच्चारण करते हुए अपसारित करना
चाहिए । जो भूत भूमि के पालक हैं वे यहाँ से अपसरण कर जावें ।
भूतों का विरोध न करते हुए मैं स्नान के कर्म करता हूँ । इसके अनन्तर
दोनों हाथों को पुटित करके राजा इस मन्त्र के द्वारा इन पूज्य देवों का
पुष्प के अभिषेक लिए आवाहन करे । जो यहाँ पर पूजा के अभिलाषी
देव हों वे सब सुरगण यहाँ पर आगमन करें । सब दिशाओं के पालक
हों और जो भी अभागी होंवे आगमन करें । फिर पुष्पों की अञ्जलि
देकर पुनः इस मन्त्र का पाठ करें ।
मेरे इस स्थान को प्राप्त करके आज यहाँ पर बिबुध गण स्थित
हों । रक्षा करने वाले आप पूजा प्राप्त करके और राजा को शान्ति
प्रदान करके स्थित हों । इसके उपरान्त राजा स्वप्न में शुभ और अशुभ
का ज्ञान प्राप्त करे । देवी की पूजा करके रात्रि में स्थान में नृप को स्वयं
ज्ञान करना चाहिए । दोषों के ज्ञाताओं द्वारा सम्मत स्वप्न में शुभ,
अशुभ के फल को जानना चाहिए । यदि बुरे स्वप्न का दर्शन हो तो
पुरुष के अभिषेचन में चौगुना हवन करना चाहिए और सौ गौओं का
दान भी दे । गौ, घोड़ा, हाथी, प्रसाद, पर्वत वृक्ष का आरोहण शुभ
करने वाला और राज्यश्री की वृद्धि करने वाला हुआ करता है । दधि,
देव, सुवर्ण, ब्राह्मण की प्रदर्शन, दुर्वा, वीणा, अक्षत, फल, पुष्प,
क्षत्र, विलेपन, शीतांशु (चन्द्र), चक्र, शत्रु का, पद्म का और सुहृद
का लाभ, रात्रि में क्षय करने वाले हैं । रत्नाकार, भूभृत और उपराग
को देखना, निबड़ के द्वारा बन्धन करने वाला होता है । माँस का
भोजन, पर्वत का विवर्त्तन, नाभि के मध्य में वृक्ष की उत्पत्ति और मृत
पुरुष उतरना, पर्वत को, नदी का तथा स्रोत लाँघना, अपने पुत्र का
मरण, रुधिर और मदिरा का पान, पायस का भोजन तथा मनुष्य पर
आरोहण हे नृप श्रेष्ठ! ये स्वप्न राजा के कल्याण, सुख, सौभाग्य,
राज्य और शत्रुओं का क्षय किया करते हैं । गधा, ऊँट, और महिष का
आरोहण राज्य के नाश करने वाले हैं । रक्त वस्त्र का परिधान,
रक्तमाला और रक्त अनुलेपन, रक्त तथा काली की कामना करता