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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 33 of 442

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Page 33

३४ ॥ श्रीकालिका पुराण ॥
अधिक भगवान् शम्भु मेरे वश में वर्त्तन करने वाले हो जायेंगे। विभेदन
करके अपने हृदय के अन्तर में लीन और भुवनाधीन जिस विद्या को
महादेव मोह से प्रतिग्रहण कर लेंगे। इसके उपरान्त मार्कण्डेय मुनि ने
कहा- हे द्विजसत्तमो ! इस प्रकार से ब्रह्माजी से कहकर जगत् के
स्रष्टा के द्वारा वीक्ष्यमाण होती हुई वह देवी फिर वहीं पर अन्तर्धान
हो गई थीं। इसके अन्तर्धान होने पर लोकों के पितामह धाता वहाँ पर
गये थे जहाँ पर भगवान् कामदेव संस्थित थे।
हे मुनिश्रेष्ठों ! ब्रह्माजी महामाया के वचनों का स्मरण करते हुए
अत्यधिक प्रसन्न हुए थे और वे आपने आपको कृतकृत्य अर्थात् सफल
मानने लगे थे। इसके अनन्तर कामदेव ने महात्मा ब्रह्मा को हंस के यान
के द्वारा गमन करते हुए देखकर शीघ्रता से समन्वित होकर उसके लिए
अभ्युत्थान किया था। उसके उपरान्त उन ब्रह्माजी को अपने समीप में
आये हुए देखकर परमहर्ष से विकसित लोचनों वाले कामदेव ने मोद
से युक्त समस्त लोकों के स्वामी ब्रह्माजी की अभिवादन किया था।
इसके अनन्तर भगवान् ब्रह्माजी ने प्रीति से मधुर और गद्गद् वचनों से
कामदेव को हर्षित करते हुए जो विष्णु माया देवी ने कहा था वही कहा
था। ब्रह्माजी ने कहा-हे वत्स! जो आपने पहले सबके मोहन करने के
विषय में वचन कहा था कि आप अनुमोहन करने वाली जो भी हो
उसका सृजन करो। हे कामदेव! उसी कार्य को सम्पादित करने के लिए
मैंने जगन्मयी योगनिद्रा देवी का मन्दराचल की कन्दरा में एकमात्र मन
के द्वारा स्तवन किया था। हे वत्स ! वह स्वयं ही मेरे सामने प्रत्यक्ष हुई
थी और अत्यन्त प्रसन्न होकर उसने यह स्वीकार कर लिया था कि मेरे
द्वारा शम्भु का मोहन किया जायेगा। हे कामदेव! दक्ष प्रजापति के
भवन में समुत्पन्न हुई उसके द्वारा शम्भुमोहन का कर्म किया ही जायेगा,
यह सर्वथा सत्य है।
कामदेव ने कहा-हे ब्रह्माजी! जो कि जगन्मयी है वह कौन है जो
योगनिद्रा इस नाम से विख्यात हुई है। जो शंकर सदा ही तप में संस्थित
रहा करते हैं वे उनके द्वारा कैसे वश्य होंगे ? उस देवी का क्या प्रभाव