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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 307 of 442

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Page 307

३१० ० श्रीकालिका पुराण ०
रक्षा करे और तं वाराही काण्ड से रक्षा करे । ॐ यं नारसिंहीं क्रव्यादों
से और अस्त्र से मेरी रक्षा करे । शस्त्रों से समस्त अस्त्रों से, मन्त्रों से
और अनिष्ट मन्त्र से चण्डिका मेरी रक्षा करें । यं सं देवी के लिए
बारम्बार नमस्कार है । ऐन्द्रीं विश्वास का घात करने वालों से मेरे मन
की रक्षा करे । ॐ महामाया के लिए नमस्कार है, ॐ वैष्णवी के लिए
बारम्बार नमस्कार है । हे परमेश्वर समस्त भूतों से सर्वत्र मेरी रक्षा करो ।
आधार में, वायु मार्ग में, समिद्ध वह्नि में वरदा के द्वारा वह आठ
अक्षरों वाला मन्त्र प्रवेश करे । जो ब्रह्मा मस्तक में धारण करते हैं गले
में हरि रक्षा करते हैं, हृदय में स्थित की चन्द्रचूड़ रक्षा करते हैं पदमगर्भ
अबीज निखिल निरतिशय प्रधान त्वं मेरी रक्षा करें ।
आद्य शेष स्वरों के समुदायों से सम पर्वतरों से बिना स्वर से भी
युक्तों से, अनुस्वार के सहित बिना विसर्गों वालो से, हरि हर विदित
जो एक सहस्र आठ हैं । वैष्णवी तन्त्र मन्त्रों का सेतुबन्ध निरन्तर निवास
करना है वही परम पवित्र और अपरज भूतल और व्योम के भोग में
मेरी रक्षा करें । आठ अंग तथा आठ मधुमती रचित तथा आठ सिद्धियाँ
आठ-आठ की संख्या जगत् में रतिकला और क्षिप्रकांङ्गष्ठ योग मुझ
में आठ अक्षर क्षरण करें । यह उसका कवच बतला दिया गया है जो
कि धर्म, और काम का साधन करने वाला है । यह परम रहस्य है और
सभी अर्थों का साधक है । मेरे द्वारा कथित इस कवच को जो कोई
एक बार श्रवण कर लेता है वह सभी कामनाओं की प्राप्ति कर लिया
करता है और परलोक में शिव के स्वरूप का भाव किया करता है ।
मेरे द्वारा कथित इस कवच को जो एक बार भी पढ़ता है वह सभी
यज्ञों के फलों का लाभ किया करता है, इसमें कुछ संशय नहीं है ।
जैसे सिंह हाथियों को परास्त कर देता और उसी भाँति वह संग्रामों में
शत्रुओं पर विजयी हो जाता है । जैसे अग्नि तृण को दग्ध कर देती है
वैसे ही वह पुरुष सदा ही शत्रु का दाह कर देता है । उसके शरीर में
शस्त्र और अस्त्र प्रवेश नहीं किया करते हैं । उसको न कभी रोग होता
है और न कभी दुःख ही होता है ।