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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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Page 256

२५८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
हुई निरन्तर पिता के घर में निवास करती हुई भी बहुत चिन्तित हुई थी
और मोह को प्राप्त हो गई। शैलों के राजा, मेनका, मैनाक और दोनों
सखियों ने उस अदीनसत्व वाली को सान्त्वना दी थी तो भी उमा ने
भगवान् शम्भु का विस्मरण नहीं किया था।
गौरी परीक्षा वर्णन
इसके बाद देवर्षि नारदजी जो अपनी इच्छा से ही परम गमन करने
वाले थे इन्द्र के द्वारा नियोजित होते हुए उस अवसर पर हिमवान् के
मन्दिर में समागत हुए थे। वे वहाँ पर अचलराज द्वारा पूजित हुए थे
जो हिमवान् महान् आत्मा वाले थे। उसे हिमवान् को छोड़कर वे देवर्षि
एकान्त में उस काली के समीप गये। उस मुनिवर ने काली के समीप
पहुँच कर उस ज्ञानशालिनी को सम्बोधित करके समस्त जगतों का हित
करने वाला परम तथ्य वचन कहा था। देवर्षि ने कहा- हे काली! मेरे
इस वचन का श्रवण करो और उसको परम सत्य समझो। तुमने
तपश्चर्या के बिना ही उन भगवान् शम्भु की सेवा की है। वे महादेव
उससे अनुराग करनेवाले भी हैं किन्तु महादेव ने तुमको त्याग दिया था।
तुम्हारे बिना वे शिव दूसरी किसी को भी ग्रहण नहीं करेंगे। इस कारण
से आप तपश्चर्या से संयुक्त होकर चिरकाल पर्यन्त महादेव जी की
आराधना करो। जब तुम तप से संस्कार वाली हो जाओगी तो वे तुमको
अपनी पत्नी के रूप में ग्रहण करेंगे। हे सुभगे! उसका यह मन्त्र है,
आप श्रवण करिये जिसके द्वारा शीघ्र ही प्राप्त होंगे।
आराधना किए हुए वे महेश्वर आपको प्रत्यक्ष होकर दर्शन देंगे।
'ॐ नमः शिवाय' यह मन्त्र सर्वदा भगवान् शंकर का प्रिय है। आप
इनके स्वरूप का चिन्तन करती हुई नियम में स्थित रहकर छह अक्षरों
वाला इस मन्त्र का जप करिए। हे गिरिजे! इससे शिव सन्तुष्ट हो
जायेंगे। महात्मा नारदजी द्वारा यह कंहने पर काली ने उस समय अपना
कर्तव्य जान लिया था क्योंकि उनका वचन सर्वथा तथ्य और हितकर
था। उस समय नारदजी काली को तपश्चर्या हेतु समुद्यत अनुमान कर