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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 237 of 442

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Page 237

൵०२ श्रीकालिका पुराण ൵०२ २३९
सत्त्व के उद्रेक से मिथ्या जो यहाँ पर होने वाली है और जो नित्य
प्राणियों की बुद्धि के स्वरूप वाली है वही आप यतियों के बन्धन को
छेदन करने हेतु हैं। ऐसा कौन है जो मुझ जैसे द्वारा आपका प्रभाव
कहने के योग्य होवे। अर्थात् प्रभाव को कोई भी मुझ सरीखा नहीं कह
सकता । जो आप सामों की सिद्धि की शक्ति हैं तथा जो आप
अथर्ववेद की हिस्सा हैं वह आप नित्यकामा हैं और मेरे इष्ट को करें।
नित्या नित्य, भागहीन, पुरस्थ जिन तन्मात्राओं से भूतों का स्वर्ग पतित
होता है उनकी सदा नित्यरूपा शक्ति आप ही हैं। कौन सी स्त्री है जो
आपके योग्य कथन करने से समर्थ हो । आप जगत् को धारण करने
वाली हैं जिनके द्वारा ब्रह्मा वश में किया जाता है वह आप नित्या मुझ
पर, हे माता! प्रसन्न होवें। आप जगत वेद में रहने वाले शक्ति के
स्वरूप वाली हैं, सूर्य के किरणों की दाह करने वाली शक्ति आप ही
हैं, आप चन्द्रिका की आह्लाद करने वाली शक्ति हैं आपका मैं स्तवन
करती हूँ और अम्बिका को प्रणाम करती हूँ। योषित् के प्रेमियों की
आप योषा हैं, आप ऊर्ध्वरेताओं की विद्या हैं, आप समस्त जगतों की
वाञ्छा हैं और आप ही भगवान् हरि की माया हैं। जो नित्य ही अनेक
स्वरूपों को धारण कर के सृष्टि और प्रलय करने वाली हैं। आप ही
ब्रह्मा, अच्युत और शिव के शरीरों के हेतु हैं। आप मुझ पर प्रसन्न हो
जाइए। मैं आपको पुनः प्रणाम करती हूँ।
इसके अनन्तर वह जगतों की माता कालिका पुनः मेनका देवी से
बोली थी कि जो भी आपका अभीष्ट वर हो उसका वरण कर लो।
इसके अनन्तर यशस्विनी मेनका ने सबसे प्रथम तो सौ पुत्रों के उत्पन्न
होने का वरदान माँगा था जो पुत्र वीर्य, पराक्रम और आयु से संयुक्त
होवें और ऋषि-सिद्धि से भी युक्त होंगे। इसके अनन्तर एक कन्या के
उत्पन्न होने का वरदान चाहा था जो सुन्दर रूप वाली गुण गणों से
शोभायमान, दोनों कुलों का आनन्द करने वाली और तीनों भुवनों में
दुर्लभ होवे। इसके पश्चात् मुनियों के समान मेनका से भगवती ने कहा
था जो मन्द मुस्कान पूर्वक उसके मनोरथ को पूर्ण करती हुई थीं। देवी