कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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Read in context२४ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
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वारणीय हैं और उपाय से कुछ शम्भु के हैं। उस सांसारिक भोगों के
सुखों से विमुख तथा एकांत विरागी भगवान् शम्भु के विषय में इससे
अन्य कोई भी कर्म नहीं करेगा, इसमें संशय नहीं है।
लोकों के पितामह लोकेश ब्रह्माजी यही चिन्तन् करते हुए ने
आकाश में स्थित होते हुए उन्होंने भूमि में स्थित दक्ष आदि को देखा
था। रति के साथ मोह से समन्वित कामदेव को देखकर ब्रह्माजी फिर
वहाँ पर गए और कामदेव को सान्त्वना देते हुए उससे बोले-हे मनोभव
अर्थात् कामदेव ! आप इस अपनी सहचारिणी पत्नी रति के साथ में
शोभायमान हो रहे हैं और यह भी आपके साथ संयुक्त होकर
अत्यधिक शोभित हो रही है। जिस रीति से लक्ष्मी देवी से भगवान्
होती है। जैसे चन्द्रमा से रात्रि और निशा से चन्द्र शोभायमान होता है
ठीक उसी भाँति आप दोनों की शोभा होती है और आपका दाम्पत्य
पुरस्कृत होता है। अतएव आप जगत् के केतु हैं और विश्वकेतु हो
जायेंगे। हे वत्स ! अब तुम इस समस्त जगत् के हित सम्पादित करने
के लिए पिनाकधारी भगवान् शम्भु को मोहित कर दो जिससे सुख के
मन वाले भगवान् शम्भु द्वारा का परिग्रह कर लेवें। किसी भी विजन
देश में, स्निग्ध प्रदेश में, पर्वतों पर और सरिताओं में जहाँ-जहाँ पर
ईश गमन करें वहाँ-वहाँ पर ही इसके साथ उनको मोहयुक्त कर दो।
इस वनिता से विमुख भगवान् हर को जो कि पूर्णतया संयत
आत्मा वाले हैं मोहित कर दो। तुम्हारे बिना अर्थात् वाला त्रिभुवन में
नहीं है। हे मनोभव ! भगवान् हर के सानुराग हो जाने पर अर्थात्
दाम्पत्य जीवन के सुखभोगों के अभिलाषी होने पर आपके शाप की
भी उपशान्ति हो जायेगी। इस कारण आप इस समय अपना ही हित
करो। हे कामदेव ! अनुराग से युक्त होकर जब शम्भु वरारोह की
इच्छा करें तो उस अवसर पर तुम्हारे उपभोग के लिए ये तुमको
सम्भावित अवश्य ही करेंगे। इसलिए जगत् की भलाई करने के लिए
तुम भगवान् हर के मोहन करने के कर्म में पूर्ण यत्न करो। महेश्वर को
मोहित करके आप शिव के केतु हो जाओ। ब्रह्माजी के इस वचन का