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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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होवें। हे भगवन्! आप तीन की मूर्ति धारण करने वाले हैं। हे हरे!
आपको नमस्कार है। हे जगत् के आनन्द स्वरूप वाले आपको
नमस्कार है। हे भक्तों के ऊपर प्रेम करने वाले! आपकी सेवा में मेरा
प्रणाम है। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-स्वायम्भुव मनु के द्वारा वे भगवान्
मत्स्य के स्वरूप धारण करने वाले प्रभु की इस रीति से भली-भाँति
स्तुति की गई थी। उस अवसर पर भगवान वासुदेव मेघों के सदृश
परम गम्भीर ध्वनि से संयुत होकर बोले थे।
श्री भगवान ने कहा-आज मैं आपकी इस तपश्चर्या से परम प्रसन्न
हूँ और आपके द्वारा बड़ी ही भक्ति की भावना से बारम्बार मेरी स्तुति
भी की गयी है। मुझे आपकी पूजा से और दान से भी परम सन्तोष
हुआ है। हे सुव्रत! अब आप वरदान माँग लो। आपका जो भी अभीष्ट
अर्थ होगा आपको मैं दूँगा। इसमें कुछ भी विचार करने की आवश्यकता
नहीं है। स्वायम्भुव मनु ने कहा-हे विष्णो! आज यदि मुझे कोई
वरदान देना है जो कि तीनों लोकों की भलाई करने वाला ही हो तो
आप मुझे वरदान देवें। उसको मैं बतलाऊँगा उसमें आप मुझसे श्रवण
कीजिए। पूर्व में कपिल मुनि ने मेरे लिए शाप दिया था कि सम्पूर्ण
जगत अर्थात् तीनों भुवन हत-प्रहत और विध्वंस हो जायेंगे। जिसने इस
पृथ्वी को उद्धृत किया है और जिसके द्वारा यह पृथ्वी प्रतिपालित की
गई है और जो इसका संहार करेंगे उन्हीं के द्वारा इसका इस समय में
प्लावन होवे। इसके उपरान्त मैं दीन हृदय वाला आपकी ही शरणागति
में प्राप्त हुआ हूँ। जिस रीति से यह त्रिभुवन जल से प्लुत (डुबा हुआ)
न होवे एवं हत-प्रहत और विध्वंस्त न होवे आप वही वरदान मुझे
प्रदान कीजिए। श्री भगवान् ने कहा-हे मनुदेव! मुझसे कपिल कोई
भिन्न नहीं है और उसी भाँति मेरे द्वारा ही कहा हुआ समझिए। इस
कारण से उन्होंने जो भी कुछ कहा है वह सर्वथा सत्य है। मैं आपकी
सहायता करूँगा। हे स्वायम्भुव! इसको आप समझ लीजिए।
इस तीनों भुवनों के हत, प्रहत और विध्वंस होने पर एवं जल में
निमग्न हो जाने पर मैं श्यामल शृंग समन्वित होऊँगा और आप उस