कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
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श्री वाराह यज्ञोत्पत्ति वर्णन
ऋषियों ने कहा-यज्ञ वाराह का देह यज्ञत्व को कैसे प्राप्त हुआ था
और वाराह के तीन पुत्र त्रेतात्व कैसे प्राप्त हुए थे ? यह अकालिक
प्रलय भगवान ने कैसे किया था और महात्मा वाराह ने महान घोर जनों
का क्षय कैसे किया था। किस प्रकार से भगवान शार्ङ्गधारी से मत्स्य
के स्वरूप के द्वारा वेदों का त्राण किया था अर्थात् वेदों की सुरक्षा
करके उनको सुरक्षित रखा था ? फिर दुबारा यह सृष्टि की रचना कैसे
हुई थी और इस भूमि को किसने समुद्धृत किया था ? वह देह कैसे
प्रवृत्त हुआ था, यह सब हे महामते! हमको बतलाइए। हे द्विज शार्दूल!
इस सबका हाल आपने प्रत्यक्ष रूप से देखा। हे महती मतिवाले! आज
हम सब इसके श्रवण करने वाले हो रहे हैं। अतएव हमको आप
बतलाने की कृपा कीजिए। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-हे द्विज शार्दूलोँ!
जो मैंने यहाँ पर एक अद्भुत सृजन किया था उसको सुनिए। आप सब
परम सावधान हो जाइए और इस समस्त वेदों के फल को प्रदान करने
वाले को सुनिए ।
यज्ञों में देवगण सन्तुष्ट होते हैं और यज्ञ में सभी कुछ प्रतिष्ठित
है। यज्ञ के द्वारा ही पृथ्वी धारण की जाती है और यज्ञ से ही प्रजा का
वरण किया करता है। अन्न के द्वारा प्राणी जीवित रहा करते हैं और
उस अन्न की उत्पत्ति मेघों के द्वारा होती है। वे मेघ यज्ञों से हुआ करते
हैं। इसलिए यह सभी कुछ यज्ञ से ही परिपूर्ण है। वह यज्ञ भगवान
शम्भु के द्वारा विदीर्ण किए हुए वाराह के शरीर से ही हुआ था। हे
द्विजो! जैसा भी मैं आपको कहता हूँ उसको आप लोग परम सावधान
होकर श्रवण कीजिए। मर्म के द्वारा वाराह के शरीर के विदारित होने
पर उसी क्षण ब्रह्मा, विष्णु और शिव देवगण ने जल से समुद्धृत करके
उस शरीर को वे आकाश के प्रति ले गये थे। उसके भेदन करने वाले
भगवान विष्णु के चक्र के द्वारा वह शरीर खण्ड-खण्ड कर दिया गया
था। उसके अंग की सन्धियाँ जो थीं वे यज्ञ पृथक्-पृथक् समुत्पन्न हुए
थे। हे महर्षियों! जिस अंग से जो समुत्पन्न हुए थे उनका सब आप लोग