Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 193 of 442

Read in context
Page 193

᪥ श्रीकालिका पुराण ᪥ १९५
आठ करोड़ गण थे। उनमें अन्य अर्ध नारीश्वर थे जो हर के
समीप थे।
भगवान् शंकर ने ही सदृश रूप वाले ध्यान में संस्थित में प्रवेश
कर गये थे जिस समय में उमादेवी के साथ भगवान् हर सुख के सहित
रमण किया करते थे। वे द्वारपाल भी अर्ध नारीश्वर हैं जो नित्य ही
आकाश के मार्ग के द्वारा गमन करते हुए उनके पीछे ही अनुगमन किया
करते हैं। ध्यान में संस्थित करने वाले ईश्वर का सलिल आदि के द्वारा
परिचर्या किया करते हैं। अनेक शस्त्रों के धारण करने वाले शम्भु
भगवान् के वे गण प्रमथ किया करते हैं। वह महान बलवान शूर
संख्या में नौ करोड़ थे। दूसरे गायन करने वाले थे जो ताल मृदंग आदि
के द्वारा वादन किया करते हैं तथा नृत्य करते हैं और मधुर स्वर में गाते
हैं। वे अनेक रूपों के धारण करने वाले वे संख्या में तीन करोड़ थे।
वे निरन्तर विचरण करने वाले महेश्वर भगवान् के पीछे गमन किया
करते हैं। वे सभी मायावी, शूर थे और सब शास्त्रों के अर्थ के
पारगामी ज्ञाता थे। सब जगह सभी कुछ के ज्ञान रखने वाले और सभी
सर्वत्र सदा गमन करने वाले थे।
वे सब मुहूर्त मात्र में सम्पूर्ण भुवन में जाकर फिर गति के द्वारा
पुनः भव को प्राप्त हो जाया करते थे। वे सब महान बल से युक्त थे
तथा अणिमा महिमा आदि आठों प्रकार के ऐश्वर्यों से समन्वित थे।
दूसरे रुद्र नामों वाले जरा और अर्धचन्द्र से मण्डित थे। वे देवेन्द्र के
आदेश से सदा ही स्वर्ग में रहा करते हैं। उनकी संख्या एक करोड़ थी
और वे सब विशेष बलवान थे। वे सदा ही हर के गण भगवान् शम्भू
की सेवा किया करते हैं तथा जो धर्मिष्ठ हैं अर्थात धर्म का समादर
करने वाले हैं उनका पालन किया करते हैं। जो पाशुपत व्रत के धारण
करने वाले हैं उनके ऊपर निरन्तर अनुग्रह किया करते हैं। जो प्रयत
आत्माओं वाले योगीजन हैं उनके विघ्नों का निरन्तर हनन किया करते
हैं। ये भगवान् हर के गण जो कि समस्त संख्या में छत्तीस करोड़ थे।
ये गण वाराह के गणों के नाश करने के लिए तथा समस्त जगतों के