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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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൵ श्रीकालिका पुराण ൵ १९
(शम्भू) के और महात्मा मुनियों के समक्ष में स्वयं ही कामदेव को
शाप दिया था। इसके अनन्तर डरे हुए रति के पति कामदेव ने उसी
क्षण में अपने बाणों को छोड़ना परित्यक्त कर दिया था और इस परम
दारुण शाप का श्रवण करके प्रत्यक्ष ही प्रादुर्भूत अर्थात् प्रकट हो गया
था वह कामदेव डर से अति गद्गद होकर तथ्य वचन कहने लगा था।
कामदेव ने कहा-हे ब्रह्माजी ! आपने किसलिए मुझे अत्यन्त
दारुण शाप दिया है। मैंने आपका कोई भी अपराध नहीं किया है। हे
लोकों के स्वामिन् ! आप तो न्याय मार्ग का अनुसरण करने वाले हैं।
हे विभो ! मैं जो करता हूँ वह सभी आपके ही द्वारा कहा हुआ करता
हूँ। यहाँ पर मुझे शाप देना उचित नहीं है क्योंकि मैंने अन्य कुछ करता
हूँ। यहाँ पर मुझे शाप देना उचित नहीं है क्योंकि मैंने अन्य कुछ भी
कार्य नहीं किया है। आपने स्वयं ही मुझ से कहा था कि मैं तथा
भगवान् विष्णु और भगवान् शम्भू ये सभी तेरे शरों के गोचर हैं अर्थात्
तेरे बाणों के लक्ष्य होंगे। यह जो कुछ भी आपने ही मुझ से कहा था
उसी आपके कथन की परीक्षा मैंने की थी अर्थात् मैंने जाँच की थी कि
आपका वचन कहाँ तक सत्य है। हे ब्रह्माजी इसमें मेरा कोई भी
अपराध नहीं है। हे जगत् के स्वामिन् ! निरपराध मुझको जो यह परम
दारुण शाप दे दिया है अब इस शाप का आप शमन कीजिए।
मार्कण्डेय मुनि ने कहा- समस्त जगतों के पति ब्रह्माजी ने उस कामदेव
के इस वचन को सुनकर उस हुतात्मा कामदेव से पुनः दया से युक्त
होकर यह प्रत्युत्तर दिया था। ब्रह्माजी ने कहा-यह सन्ध्या तो मेरी बेटी
है क्योंकि इसके प्रकाश से ही तुमने मुझको अपने बाणों का लक्ष्य बना
लिया था। इसी कारण से मैंने तुमको शाप दिया था। इस समय में
अब मेरा क्रोध शान्त हो गया है। हे मनोभव अर्थात् कामदेव ! अब मैं
तुझसे कहता हूँ कि आपको जो मैंने दिया था वह किसी भी तरह से
शमन हो जायेगा। तू भगवान् शंकर के तीसरे नेत्र की अग्नि से
भस्मीभूत होकर भी फिर उनकी ही कृपा से पुनः अपने शरीर की
प्राप्ति कर लेगा। जिस समय भगवान् हर कामदेव अपनी पत्नी का