Skip to content
SarvaKosh
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 168 of 442

Read in context
Page 168

गया था। विराट्, रुद्र, मनु, दक्ष और मरिचि आदि मानस पुत्रों ने
जिस-जिस सर्ग का पृथक किया था वह प्रतिसर्ग भी कहा गया है।
विराट सुत ने वंश में होने वाले मनुओं का सृजन किया था। जिनके
द्वारा यह जगत् वितत किया गया है। मनु ने सात मनुओं की रचना
करके बहुत सी प्रजा को बना दिया था अर्थात् बहुत अधिक प्रजा की
सृष्टि कर दी थी। प्रजा की सृष्टि की इच्छा वाले मनु ने जो स्वायम्भुव
नाम वाले थे उन्होंने दूसरे सुत छः मनुओं का सृजन किया था। उन छः
मनुओं के नाम ये हैं—स्वरोचिष, आँत्तभि, तामस, रैवत, चाक्षुष और
महान तेज से संयुत विवस्वान। स्वयम्भुव मनु ने यश, राक्षस, पिशाच,
नाग, गन्धर्व, किन्नर, विद्याधर, अप्सरायें, सिद्ध, भूतगण, मेघ जो
विद्युत के सहित थे, वृक्ष, लता, गुल्म, तृण आदि मत्स्य, पशु, कीट,
जल में समुत्पन्न होने वाले और स्थल में समुत्पन्न इन सबकी रचना की थी।
इस प्रकार के सबको स्वयम्भुव मनु ने अपने सुतों के सहित सृष्ट
किया था। वह इसका प्रति सर्ग प्रकीर्त्तित किया गया है। अन्य जो छः
मनु थे उन्होंने भी अपने-अपने अन्तर में स्वयं प्रतिसर्ग को चराचर में
प्राप्त किया करते हैं। यज्ञ का यज्ञयूप और प्राग्वंश हुआ था तथा
वाराह की भाँति धर्म और अधर्म एवं सब गुणों की सृष्टि की थे।
देवर्षि दक्ष ने परम श्रेष्ठ बहुत से सुतों का समुत्पादन करके सोमय
आदि महर्षियों को और पितृगणों को उत्पन्न किया था तथा सृष्टि को
प्रवृत्त किया था यह इसका प्रतिसर्ग कहा गया है। हे विप्रो! विप्र उसके
मुख से उत्पन्न हुए थे और क्षत्रिय दोनों बाहुओं से समुत्पन्न हुए थे।
ऊरुओं से वैश्यों की उत्पत्ति हुई थी तथा शूद्र पादों से समुत्पन्न हुए थे।
चारों वेद ब्रह्माजी के चार मुखों से निःसृत हुए थे। यह ब्रह्माजी का
प्रतिसर्ग है जो ब्रह्मसर्ग इस नाम से कहा गया है। मरीचि ऋषि से
कश्यप ऋषि ने जन्म ग्रहण किया था। और कश्यप से यह सम्पूर्ण
जगत समुत्पन्न हुआ था। जिसमें देव, दैत्य और दानव सभी उत्पन्न हुए
थे। यह उसका सर्ग कीर्ति हुआ था।
अत्रि ऋषि के नेत्रों से चन्द्रदेव ने जन्म धारण किया था और तभी