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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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Page 152

१५४ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
थी। उमा के क्षेत्र में जो जल गिरा था उससे महानदी समुत्पन्न हुई थी
जो महाकाल नामक सर से निकली है। सरों में श्रेष्ठ महाकाल में गिरि
वह जल पतित हुआ था। हिमवान पर्वत के पार्श्वभाग में भगवान शम्भु
की सन्निधि में जो जल गिरा था उससे गोमती नाम वाली नदी समुत्पन्न
हुई जो गोमद से उदीरित है।
मैनाक नाम वाला जो पुत्र मौलराज के ही समान था पहले वह
उसी शिखर में मेनका के उदर से समुत्पन्न हुआ। यह जल वहाँ गिरा
था उसका शुभनाम दविका था जो महादेव के द्वारा सागर की ओर
प्रेरित की गई थी। जो जल हंसावतार की सन्निधि में संगत हुआ था
उससे सरयू नाम वाली नदी उत्पन्न हुई थी जो परम पुण्यतम कही गई
है। जो जल खाण्डव वन की सन्निधि में महापाश्र्व के गिरे थे जो कि
हिमवान की कंदरा में याम्य में पतित हुये थे वहाँ इरा के द्रुद के मध्य
से इरावती नाम वाली नदी के जन्म धारण किया था जो सरिताओं में
परम श्रेष्ठ है। ये सभी सरितायें स्नान पान और सेवन से जाह्नवी गंगा
के तुल्य है। ये सब सदा दक्षिण सागर में गमन करने वाले मनुष्यों को
फल दिया करती हैं। ये नदियाँ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सनातन
बीज भर्ता हैं अर्थात् पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति के लिए कारण स्वरूप
ही हैं। ये सात महानदियाँ सर्वदा देवों के भोगों को प्रदान करने वाली
हैं। इस रीति से सता नदियाँ समुत्पन्न हुई थी जो सदा ही पुण्य जल
वाली थीं।
देवों की सन्निधि में अरुन्धती और वशिष्ठ मुनि का विवाह हो
जाने पर इस प्रकार से उस अरुन्धती के साथ विवाह करके उस अवार
पर वे वशिष्ठ मुनि उस अरुन्धती को लेकर देवों के द्वारा दिये हुए
स्थान में ही उसी समय से वशिष्ठ मुनि श्रेष्ठ ब्रह्मा, विष्णु और महेश
के वचन से ही उस पूर्वोक्त स्थान पर चले गये थे। वे समस्त जगतों
के हित के सम्पादन करने के लिए तीनों भुवनों में सर्वदा जिस-जिस
युग में स्त्रियों को जैसे भी है वैसे ही हो जाते हैं। वेशभाव और शरीर
को धर्म से नियोजन करके यह परम प्रसन्न बुद्धिवाले, प्रमाद से रहित