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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

Page 113 of 442

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Page 113

११४ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ

करने वाला है, जो ब्राह्मण की हत्या करने वाला है, जो गुरुपत्नी के
साथ संगम करने वाला है और जो अपने आपका घात करने वाला हो,
इन सबका वध करना पुण्य ही प्रदान करने वाला होता है ।
मार्कण्डेय मुनि ने कहा-उन सबके इस प्रकार के अभिप्राय को
समझकर और कर्म को देखकर तथा भय से डरी हुई रोहिणी को
देखकर जो उसकी अत्यधिक प्रिय और मन को रमण करने वाली परम
सुन्दरी थी, उस सबसे सम्भोग को न करने से उत्पन्न क्षोभ व अपने
आपको अपराधी सोचकर उस डरी हुई रोहिणी को उनके हाथ से
मोचन कर दिया था अर्थात् छुड़ा लिया था । उस चन्द्र ने रोहिणी को
छुड़ाकर अपनी दोनों बाहुओं से उसका (रोहिणी) भली-भाँति आलिंगन
करके उस चन्द्र ने जो कृत्तिका आदि भामनियां थी उस सबका धारण
कर दिया था । इस भाँति इन्दु का धारण करती हुई कृत्तिका आदि से
लेकर मघा से अन्त तक भामिनियों ने उस रोहिणी को देखती हुई को
मनस्विनियों से साम्य वचन कहे थे। हे निशानाथ! हम सबका निरसन
करने वाले आपको न तो कुछ लज्जा ही है और न पाप से कोई डर
ही है । आप तो एक प्राकृत अर्थात् साधारण जन की ही भाँति बरताव
कर रहे हैं ।
हम सब चारित्र व्रत के धारण करने वाली है अर्थात् हमारे अन्दर
चरित्र सम्बन्धी कोई भी दोष नहीं है फिर ऐसी हम सबका निराकरण
करके जो सर्वदा ही आपकी भक्ति करने वाली है फिर क्यों आप मूढ़
मानव की भाँति इस एक ही रोहिणी का सदा सेवन किया करते हैं
अर्थात् इसी से प्रणयानुराग करते हैं ? क्या आपको धर्म का ज्ञान नहीं
हुआ है जो पहले वेदों के मूल वाला सुना गया है जो कि आप तत्पुरुषों
के द्वारा निन्दित और धर्म से हीन कर्म को आप कर रहे हैं ? धर्मशास्त्र
के अर्थ को गमन करने वाले कर्म को यथोचित रीति से करने वाली
और उद्वाहित अर्थात् ब्याही हुई पिता का आप केवल मुख भी नहीं
देखते हैं । हे निशापते! पूर्व में कहते हुए पिता के मुख से नारद के लिए
जो सुना है उस दक्ष प्रजापति के धर्म-शास्त्र के अर्थ का आप श्रवण