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कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

by महर्षि व्यास

Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)

DevanagariSanskritpublished442 pages

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ൡ श्रीकालिका पुराण ൡ १११
तपश्चर्या के द्वारा ही मर्यादा की स्थापना करेगी। वह साध्वी तपस्या
करने के लिए ही इस समय चन्द्रभाग पर्वत पर गई है। हे तात! वह
तपस्या के किसी भी भाव को नहीं जानती है इस कारण से वह जिस
प्रकार से उपदेश को प्राप्त कर लेवे आप वैसा ही करिए।
आप भी अपने इस वर्तमान रूप का परित्याग करके अन्य रूप
धारण करके उसके समीप में तपश्चर्या का निर्देश कीजिए। आपके
इस स्वरूप को देखकर पूर्व में जैसे वह लज्जा को प्राप्त हुई थी उसी
भाँति अब वह लज्जा को पाकर आपके आगे वह कुछ भी नहीं
कहेगी। आप अपने रूप का त्याग करके ही अन्य रूप वाले बन
जावें। फिर उस महाभाग वाली सन्ध्या के लिए उपदेश देने को गमन
करें। मार्कण्डेय मुनि ने कहा- 'ऐसा ही होगा', यह कहकर वशिष्ठ भी
जटाधारी ब्रह्मचारी बन गये जो एकदम तरुण था। मुनि वशिष्ठ
चन्द्रभाग पर्वत पर उस संध्या के समीप में गये थे वहाँ पर देवसर ऐसे
परिपूर्ण था जैसे गुण में मानसरोवर ही होवे। इसके उपरान्त उस
वशिष्ठ मुनि ने इस सरोवर के तट पर गमन करती हुई उस सन्ध्या को
देखा था। वह कमलों से समुज्ज्वल सरोवर तट पर समवस्थित उसके
द्वारा उसी भाँति शोभयमान हो रहा था जैसे प्रदोष के समय उगे हुए
चन्द्रमा और नक्षत्रों मुनि ने सम्भाषण किया था। वहाँ पर मुनि ने
वृहल्लोहित नाम वाला सरोवर भी देखा था।
उस सरोवर से चन्द्रभागा नदी दक्षिण सागर को जाती हुई थी जो
उस पर्वत के महान शिखर का भेदन करके ही जा रही थी। वह नदी
चन्द्रभागा पश्चिम शिखर का भेदन करके ही वहन कर रही थी जैसे
हिमवान् पर्वत से गंगा सागर को गमन करती है। ऋषियों ने कहा-हे
विपेन्द्र! चन्द्रभागा उस महागिरि में कैसे समुत्पन्न हुई थी। वह सर भी
कैसा था जिसका नाम वृहल्लोहित है। वह चन्द्रभाग नाम वाला पर्वत
पर्वतों में श्रेष्ठ कैसे हुआ था और चन्द्रभागा नाम वाली वृषोदका नदी
किससे उत्पन्न हुई थी? इस सबके श्रवण करने की इच्छा होते हुए हमारे
हृदय में बड़ा भारी कौतुक है। हम चन्द्रभागा का महात्म्य तथा गिरि के