कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
by महर्षि व्यास
Source: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (origin)
Page 107 of 442
Read in context१०८ ऒ श्रीकालिका पुराण ऒ
वह महानदी शिप्र से निकली थी अतएव उसका 'शिप्रा' यह शुभ नाम
पूर्व में ही ब्रह्माजी ने रखा था । जिसमें कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि
के दिन जो भी कोई मनुष्य स्नान किया करता है वह मनुष्य अत्यन्त
देदीप्यमान विमान के द्वारा भगवान् विष्णु के लोक में गमन किया
करता है । तात्पर्य यही है कि इस महानदी में कार्तिक मास की पूर्णमासी
में स्तवन करने का ऐसा फल हुआ करता है कि वह सीधा विष्णु लोक
की प्राप्ति कर लिया करता है । पूरे कार्तिक मास में शिप्रा नदी के जल
में जो भी मनुष्य स्नान किया करता है वह सीधा ही ब्रह्माजी के लोक
को चला जाया करता है और कुछ समय तक वहाँ दैविक सुखों का
भोग करके पीछे संसार के जन्म और मृत्यु के निरन्तर आवागमन से
मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति कर लिया करता है । ऋषिगणों ने
कहा-महामुनि वशिष्ठ जी ने किस प्रकार से अरुन्धती देवी के साथ
विवाह किया था ? हे ब्रह्मण, वह अरुन्धती किसकी पुत्री समुत्पन्न हुई
थी ? यह सभी आप कृपा करके हमको वर्णन करके समझाइए ।
वह परमश्रेष्ठा देवी अरुन्धती तीनों लोकों में पतिव्रता नारियों में
बहुत ही अधिक प्रसिद्ध हुई थी । वह ऐसी ही पतिव्रता नारी थी कि
अपने पतिदेव के चरणों के अतिरिक्त अन्य किसी भी स्थान में अपने
नेत्रों से नहीं देखा करती थी । जिस देवी अरुन्धती को केवल कथा का
ही श्रवण करके जो कि महात्म्य के सहित है स्त्रियाँ स्मरण करके यहाँ
सतीत्व को प्राप्त करती हुई मरकर भी अन्य जन्म में भी सतीत्व को
प्राप्त किया करती हैं । कालधर्म को समासन्न होने वाला पुरुष जिसका
दर्शन नहीं किया करता है तथा जो भी शुचि होता है वह पुरुष
पापकारी होता है । वह देवी के जन्म का वर्णन आप हमारे समझ में
करने की कृपा करिए । मार्कण्डेय ऋषि ने कहा था-आप लोग
भली-भाँति श्रवण कीजिए जैसे वह समुत्पन्न हुई थी और जिस प्रकार
से उस देवी ने अपने पति के स्वरूप वशिष्ठ मुनि को प्राप्त किया था
और जो वह प्रसिद्ध पतिव्रता हुई थी । जो सन्ध्या पहले ब्रह्माजी पुत्री
मन से ही समुत्पन्न हुई थी उसने तपस्या का तपन किया था और वहीं